जिला कारागार देहरादून में मानवाधिकार संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती, स्वतंत्र निगरानी समिति गठित
मानवाधिकार विशेषज्ञ और समाजसेवी हर्ष निधि शर्मा को मानवाधिकार विशेषज्ञ के रूप में किया गया शामिल

देहरादून 29 नवंबर। देहरादून जिला कारागार में बंदियों के मानवाधिकार संरक्षण, पारदर्शिता और बेहतर कारागार प्रबंधन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड मानवाधिकार आयोग के निर्देशों पर एक स्वतंत्र निगरानी समिति का गठन किया गया है। समिति में वरिष्ठ पत्रकार, मानवाधिकार विशेषज्ञ और समाजसेवी हर्ष निधि शर्मा को मानवाधिकार विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया गया है।
यह कदम कारागारों में मानवाधिकारों की रक्षा तथा बंदियों के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
समिति में शामिल प्रतिष्ठित सदस्य
स्वतंत्र निगरानी समिति में निम्न प्रमुख सदस्यों को सम्मिलित किया गया है—
जेलर, जिला कारागार देहरादून
हर्ष निधि शर्मा, मानवाधिकार विशेषज्ञ
चिकित्साधिकारी, जिला कारागार
श्रीमती गिरबाला जुयाल, समाजसेवी, सुद्धोवाला
इन सदस्यों का चयन कारागार व्यवस्था में विशेषज्ञता, समाजसेवा और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण को आधार बनाकर किया गया है।
समिति के उद्देश्य और भूमिका
समिति का मुख्य लक्ष्य है—
कारागार में निरुद्ध बंदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण
जेल नियमावली और प्रक्रियाओं का सही पालन
बंदियों की शिकायतों का त्वरित एवं निष्पक्ष निस्तारण
कारागार में उत्पीड़न, मारपीट, प्रताड़ना जैसे मामलों की जांच और रोकथाम
कारागार प्रशासन की जवाबदेही व पारदर्शिता को बढ़ाना
समिति को प्राप्त शिकायतों की जांच कर उनकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को गोपनीय रूप से भेजी जाएगी, ताकि आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध ढंग से की जा सके।
कारागार सुधारों की ओर एक बड़ा कदम
जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक ने बताया कि इस समिति के गठन से जेल प्रशासन में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण को और बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि हर्ष निधि शर्मा के अनुभव और विशेषज्ञता से कारागार सुधारों में उल्लेखनीय परिवर्तन आने की उम्मीद है, जिससे बंदियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और अधिकार-सम्मत वातावरण सुनिश्चित हो सकेगा।
समिति नियमित रूप से कारागार का निरीक्षण करती रहेगी और बंदियों के हित में आवश्यक कदम उठाती रहेगी। इस पहल से देहरादून के जिला कारागार में एक संवेदनशील, पारदर्शी एवं मानवाधिकार आधारित प्रशासन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।



