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आपात स्थिति में खाद्यान्न भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था, आयुष कॉलेजों में रैगिंग के बेहद कम मामले

देहरादून, 10 मार्च। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि आपात स्थिति में खाद्यान्न आपूर्ति और भंडारण को लेकर उत्तराखंड में पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। यह जानकारी राज्यसभा में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद महेंद्र भट्ट द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई।
केंद्र सरकार की ओर से उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने बताया कि भंडारण क्षमता की आवश्यकता मुख्य रूप से चावल और गेहूं की खरीद, बफर स्टॉक मानकों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संचालन पर निर्भर करती है। सरकार समय-समय पर भंडारण की स्थिति का आकलन और निगरानी करती है तथा आवश्यकता के अनुसार भारतीय खाद्य निगम और केंद्रीय भंडारण निगम के माध्यम से नई भंडारण क्षमता का निर्माण या किराये पर गोदाम उपलब्ध कराए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में वर्तमान में पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध है। राज्य सरकार के स्वामित्व वाले गोदामों में पर्वतीय क्षेत्रों में 0.53 लाख टन तथा गैर-पर्वतीय क्षेत्रों में 1.52 लाख टन भंडारण क्षमता है। वहीं भारतीय खाद्य निगम के पर्वतीय क्षेत्रों में 0.015 लाख टन और गैर-पर्वतीय क्षेत्रों में 2.039 लाख टन भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त केंद्रीय भंडारण निगम के पास उत्तराखंड में कुल 95,698 टन क्षमता वाले 7 गोदाम मौजूद हैं।
इसी प्रकार राज्यसभा में आयुष मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की स्थिति को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने बताया कि वर्तमान वर्ष में देशभर के सरकारी आयुष मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के कुल पांच मामले सामने आए हैं।
उन्होंने बताया कि आयुष मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग रोकने के लिए सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग द्वारा समय-समय पर आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और सोवा-रिग्पा संस्थानों को एंटी-रैगिंग प्रयासों को मजबूत करने तथा रैगिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए जाते हैं।
इसके तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संस्थानों में एंटी-रैगिंग समिति और एंटी-रैगिंग स्क्वॉड का गठन अनिवार्य किया गया है। साथ ही नए छात्रों के लिए आयोजित फाउंडेशन कार्यक्रम के दौरान रैगिंग विरोधी नीति पर प्रस्तुतीकरण और संवादात्मक चर्चा जैसी गतिविधियों को भी अनिवार्य किया गया है।
सरकार ने सभी शिक्षण संस्थानों को यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार रैगिंग मुक्त परिसर सुनिश्चित करने, शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था को व्यापक रूप से प्रचारित करने और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने के निर्देश दिए हैं।

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