
आशारोड़ी चेकपोस्ट पर शोक सभा के साथ विरोध प्रदर्शन किया
दिव्यांशु के दादा हरबीर सिंह मीडिया के सामने फफक पड़े
देहरादून 03 अप्रैल
। राजधानी देहरादून में बीते 23 मार्च को मुजफ्फरनगर के छात्र दिव्यांशु जटराना की हत्या हुई थी। दिव्यांशु जटराना की हत्या का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। किसान नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के तराई इलाकों से हजारों किसान देहरादून पहुंचे और देहरादून के आशारोड़ी चेकपोस्ट पर शोक सभा के साथ विरोध प्रदर्शन किया।
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में 23 मार्च को छात्रों के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में मुजफ्फरनगर जिले के रहने वाले छात्र दिव्यांशु जटराना की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में आज शुक्रवार तीन अप्रैल को आशारोड़ी चेक पोस्ट पर दिव्यांशु को श्रद्धांजलि देने के लिए शोक सभा का आयोजन किया गया, जो देखते ही देखते बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया।
इस प्रदर्शन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली, मेरठ, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बिजनौर के अलावा उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून से भी बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने दिव्यांशु को श्रद्धांजलि दी और उसके लिए न्याय की मांग उठाई। किसानों ने देहरादून में बढ़ते अपराध और नशे के कारोबार को लेकर भी कड़ा विरोध जताया।
शोक सभा के दौरान भावुक पल भी देखने को मिला, जब दिव्यांशु के दादा हरबीर सिंह मीडिया के सामने फफक पड़े। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का सहारा छिन गया है और अब उन्हें सिर्फ न्याय चाहिए। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि देहरादून को हमेशा एक शांत और शिक्षा नगरी के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन अब यहां का माहौल बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अपने बच्चों को पढ़ने के लिए देहरादून भेजते हैं, लेकिन अगर ऐसी घटनाएं होती रहीं तो लोग अपने बच्चों को यहां भेजना बंद कर देंगे।
टिकैत ने देहरादून में बढ़ते नशे के कारोबार पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देवभूमि की पहचान इस तरह से नहीं बदलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे का कारोबार बिना पुलिस की लापरवाही के संभव नहीं है। खासकर शैक्षणिक संस्थानों के आसपास ड्रग्स की उपलब्धता पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर निशाना
किसान नेता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुलिस अपने मूल काम से भटककर अन्य गतिविधियों में उलझी हुई है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रॉपर्टी से जुड़े बाहरी तत्व सक्रिय हो गए हैं और स्थानीय लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
पलायन, किसान और व्यवस्था पर चिंता
टिकैत ने उत्तराखंड में पलायन और किसानों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहाड़ के मूल निवासी पलायन कर रहे हैं, जबकि बाहरी लोग यहां आकर बस रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है और व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। दिव्यांशु जटराना की मौत ने न सिर्फ एक परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि देहरादून की कानून-व्यवस्था और सामाजिक हालात पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आशारोड़ी में किसानों का यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में और बड़ा आंदोलन का रूप ले सकता है, अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।




