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देहरादून में 9 दिवसीय ‘दून पुस्तक महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ; सीएम धामी ने किया 26 गढ़वाली एवं कुमाउनी पुस्तकों का लोकार्पण

पुस्तकें खरीदकर पढ़ने से न केवल व्यक्ति का ज्ञान बढ़ता है, बल्कि इससे प्रकाशकों और ज्ञान की समृद्ध परंपरा को भी मजबूती मिलती है- सीएम धामी

नौ दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में गढ़वाली, कुमाऊँनी सहित कई भाषाओं की लाखों पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी

– इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘दून साहित्य उत्सव’ है, जहाँ जाने-माने लेखक, फिल्मकार, विचारक और जानी-मानी हस्तियाँ पैनल चर्चाओं और इंटरैक्टिव सत्रों के ज़रिए पाठकों से जुड़ेंगी

– नितिन सेठ, इम्तियाज़ अली, अखिलेश मिश्रा, आचार्य प्रशांत, शुभांशु शुक्ला, ब्रिगेडियर सुशील तंवर, संजीव चोपड़ा, लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ जैसी जानी-मानी हस्तियाँ विभिन्न सत्रों में हिस्सा लेंगी

देहरादून 04 अप्रैल। शनिवार को देहरादून में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, शिक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वाधान में नौ दिवसीय ‘दून पुस्तक महोत्सव’ का शानदार आगाज हुआ।

देहरादून के परेड ग्राउंड में 4 से 12 अप्रैल तक चलने वाले दून पुस्तक महोत्सव के भव्य समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अध्यक्ष प्रोफेसर मिलिंद सुधाकर मराठे, उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री खजान दास, देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल, न्यास के निदेशक युवराज मलिक और देवभूमि विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष अमन बंसल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहें।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अपने उद्बोधन के दौरान सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने उत्तराखंड को भारतीय संस्कृति और वीरता का संगम बताते हुए कहा कि जिस तरह शरीर के लिए व्यायाम जरूरी है, वैसे ही मन के लिए पुस्तकों का वाचन अनिवार्य है। उन्होंने वेदव्यास, महर्षि कण्व, सुंदरलाल बहुगुणा और बछेंद्री पाल जैसी विभूतियों का जिक्र करते हुए इस भूमि की बौद्धिक उर्वरता को रेखांकित किया। उन्होंने इस दौरान कवि सुमित्रानन्दन पन्त की कविता ‘मैं सबसे छोटी होऊँ’ की पंक्तियां पढ़ते हुए उनकी साहित्यिक विरासत का जिक्र किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह महोत्सव साहित्य, संस्कृति और कला का एक अद्भुत संगम है। उन्होंने उत्तराखंड को ज्ञान और संस्कृति की देवभूमि बताते हुए कहा कि महाकवि कालिदास ने ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ की रचना इसी भूमि पर की थी। उन्होंने शैलेष मटियानी, लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ और रस्किन बॉन्ड जैसे साहित्यकारों के योगदान को याद करते हुए कहा कि पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि ये पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान को जीवित रखती हैं और हमें सोचने-समझने की शक्ति प्रदान करती हैं। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि पुस्तकें खरीदकर पढ़ने से न केवल व्यक्ति का ज्ञान बढ़ता है, बल्कि इससे प्रकाशकों और ज्ञान की समृद्ध परंपरा को भी मजबूती मिलती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में सम्मानित अतिथियों ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित गढ़वाली-कुमाउनी भाषा की पुस्तकों का लोकार्पण किया।

गढ़वाली में अनूदित पुस्तकें जैसे – चौरी-चौरा जनक्रांति को नयो सबेरो, नन्ना हैरा चखुला, उम्मीदै किरण, गैरा सागरा अजूबा, आदमी अर छैल अर हौरी कहानि आदि, और कुमाउनी भाषा में अनूदित पुस्तकें जैसे – माटि म्यर देशे कि, अभिमानै हार, बढ़नै जाणी कान, खाटू श्यामक अणसुणि कहाणि, गुलाब क दगड़ू आदि कुल 26 पुस्तकों का लोकार्पण किया।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथिगणों द्वारा महोत्सव में स्थापित बाल मंडप का निरीक्षण किया गया। बाल मंडप में बच्चों हेतु स्थापित इंटरेक्टिव लर्निंग कॉर्नर का उन्होंने निरीक्षण किया। बाल मंडप में पेंटिंग गतिविधि में प्रतिभाग करने वाले बच्चों से मुख्य अतिथि द्वारा बातचीत की गयी। उत्कृष्ट कला प्रदर्शन करने वाले बच्चों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपहार स्वरूप पुस्तकें ‘एग्जाम वॉरियर्स एवं चंद्रयान’ भेंट किया।

विशिष्ट अतिथि आचार्य बालकृष्ण ने पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महोत्सव केवल एक मेला नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति के आदान-प्रदान का मंच है। उन्होंने आधुनिक तकनीक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि AI अपने आप में चैतन्य चीज नहीं है, वह केवल डेटा सर्च करने का काम करता है, अतः वास्तविक सूचना और ज्ञान के लिए मूल लेखकों को पढ़ना जरूरी है।

समारोह के अंत में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेश युवराज मलिक ने धन्यवाद ज्ञापन के दौरान मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य स्थापना के 26 वर्षों बाद पहली बार आध्यात्म के इस बड़े केंद्र में साहित्य, कला और संस्कृति का ऐसा अनूठा संगम हो रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए रोडमैप के अनुसार यह देश का सर्वोत्तम पुस्तक मेला बनेगा और उत्तराखंड साहित्य के मानचित्र पर वैश्विक स्तर पर चमकेगा।

इस महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण ‘दून लिट फेस्ट’ है, जहाँ नितिन सेठ, कुलप्रीत यादव, अखिलेंद्र मिश्रा, आचार्य प्रशांत, शुभांशु शुक्ला और लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ जैसे प्रतिष्ठित लेखक, फिल्मकार, चिंतक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तित्व विभिन्न विषयों पर संवाद में भाग लेंगे। पुस्तकों के अलावा, दून पुस्तक महोत्सव 2026 में प्रतिदिन कहानी सत्र, रचनात्मक कार्यशालाएँ, बच्चों के लिए क्विज़ और प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएंगी, साथ ही शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी होंगे। शाम के समय पांडवाज, नरेंद्र सिंह नेगी, ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ और वंशिका जोशी जैसे प्रसिद्ध कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और संगीत कार्यक्रम माहौल को उत्सवमय बनाएंगे।

यह महोत्सव ‘राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय’ के माध्यम से डिजिटल पठन को भी बढ़ावा देगा, जिसमें 22 से अधिक भारतीय भाषाओं और अंग्रेज़ी में हजारों पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध हैं। दून पुस्तक महोत्सव सभी को 4 से 12 अप्रैल 2026 तक परेड ग्राउंड में इस साहित्यिक और सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता है।

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