देहरादून 16 जनवरी 
। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कन्हैया लाल डीएवी महाविद्यालय, रुड़की में आयोजित सम्मान समारोह कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को समाज की चेतना का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि जिस समाज में शिक्षक सुरक्षित, सम्मानित और संतुष्ट होते हैं, वही समाज प्रगति के शिखर को छूता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे स्किल डेवलपमेंट से जोड़कर युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसने नई शिक्षा नीति को लागू किया है। इसके तहत विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। राज्य में 20 मॉडल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। साथ ही छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए महिला छात्रावास, आधुनिक आईटी लैब और नए परीक्षा भवनों का निर्माण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के साथ शेवनिंग उत्तराखण्ड छात्रवृत्ति को लेकर समझौता किया गया है, जिसके तहत राज्य के पांच प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मास्टर्स की पढ़ाई के लिए ब्रिटेन भेजा जाएगा। इसके अलावा देश की 100 श्रेष्ठ रैंकिंग वाली संस्थाओं में प्रवेश लेने वाले युवाओं को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही है। महाविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ ही नौ नए कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। उत्कृष्ट शोध पत्रों के प्रकाशन पर विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जा रहे हैं।
नकल माफियाओं के खिलाफ सरकार की सख्ती पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके तहत 100 से अधिक माफिया जेल भेजे जा चुके हैं। पिछले साढ़े चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी गई हैं, जो राज्य गठन के बाद किसी भी सरकार द्वारा दी गई कुल नियुक्तियों से कहीं अधिक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। 1 जुलाई 2026 के बाद केवल वही मदरसे संचालित होंगे, जो सरकार द्वारा निर्धारित आधुनिक सिलेबस पढ़ाएंगे। बिना शैक्षिक योग्यता के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले धार्मिक गुरुओं पर भी नियंत्रण किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों का समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना है।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी, विधायक श्री प्रदीप बत्रा, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेंद्रपाल सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
