देहरादून, 03 फरवरी 2026। पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड श्री दीपम सेठ की अध्यक्षता में सरदार पटेल भवन स्थित सभागार में मंगलवार को एक उच्च स्तरीय अपराध एवं कानून व्यवस्था समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ गढ़वाल एवं कुमाऊँ रेंज के प्रभारी, सभी जनपदों के पुलिस अधीक्षक तथा एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में प्रदेश की वर्तमान अपराध स्थिति, कानून व्यवस्था, लंबित विवेचनाओं तथा जनशिकायतों के निस्तारण की गहन समीक्षा की गई। पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि गंभीर आपराधिक घटनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
डीजीपी ने जानकारी दी कि हाल ही में ऋषिकेश में महिला की गोली मारकर हत्या के मामले में लापरवाही बरतने पर एम्स चौकी प्रभारी एसआई साहिल वशिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। वहीं कोतवाली नगर देहरादून में युवती के जघन्य हत्याकांड में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर खुड़बुड़ा चौकी प्रभारी एसआई प्रद्युम्न नेगी को भी निलंबित किया गया है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों मामलों की जांच एसपी क्राइम श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे को सौंपी गई है। साथ ही अन्य संबंधित कर्मियों की भूमिका की जांच कर 07 दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा हरिद्वार जनपद के भगवानपुर थाना क्षेत्र में रविदास जयंती के दौरान दो पक्षों में हुए संघर्ष एवं गोलीबारी की घटना में गंभीर लापरवाही पर हल्का प्रभारी चुड़ियाला एसआई सूरत शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक क्राइम, हरिद्वार श्री जितेन्द्र मेहरा को सौंपी गई है तथा अन्य पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच रिपोर्ट भी सात दिन के भीतर मांगी गई है।
भूमि धोखाधड़ी (लैंड फ्रॉड) के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए डीजीपी ने निर्देश दिए कि ऐसे सभी प्रकरणों में क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर पर अनिवार्य रूप से समयबद्ध एवं पारदर्शी प्रारंभिक जांच की जाएगी। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि मामला सिविल है अथवा आपराधिक, जिसके पश्चात ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लंबित भूमि संबंधी मामलों की पुलिस मुख्यालय स्तर से सतत मॉनिटरिंग की जाएगी।
डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि सिविल मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने वाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही माननीय मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सतर्कता विभाग को भ्रष्ट आचरण में संलिप्त पुलिस कर्मियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध त्वरित और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में महानिदेशक अभिसूचना एवं सुरक्षा श्री अभिनव कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक/निदेशक विजिलेंस, अपराध एवं कानून व्यवस्था श्री वी. मुरुगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन श्री ए.पी. अंशुमान, पुलिस महानिरीक्षक पी/एम श्रीमती विम्मी सचदेवा, आईजी कुमाऊँ परिक्षेत्र श्रीमती रिधिम अग्रवाल, आईजी दूरसंचार श्री कृष्ण कुमार वी.के., आईजी साइबर श्री नीलेश आनन्द भरणे, आईजी अभिसूचना एवं सुरक्षा श्री करन सिंह नगन्याल, आईजी गढ़वाल परिक्षेत्र श्री सदानन्द दाते, आईजी अपराध एवं कानून व्यवस्था श्री सुनील कुमार मीणा, आईजी कार्मिक श्री योगेन्द्र रावत, डीआईजी श्री धीरेन्द्र गुंज्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।

