देहरादून 07 जुलाई।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) उत्तराखंड में भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश (एनएच-07) फोर/सिक्स लेन परियोजना को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल राजमार्ग के रूप में विकसित कर रहा है। लगभग 20 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का निर्माण 743 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत किया जा रहा है। परियोजना के पूरा होने पर देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा चारधाम यात्रा, पर्यटन और स्थानीय यातायात को बड़ी राहत मिलेगी।
एनएचएआई के अनुसार वर्तमान दो-लेन मार्ग पर प्रतिदिन करीब 18,456 वाहनों का आवागमन होता है। भविष्य में यातायात बढ़ने की संभावना को देखते हुए मार्ग का चौड़ीकरण आवश्यक माना गया है। फोर लेन बनने से सड़क की ज्यामिति में सुधार होगा, जाम कम होगा और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।
वन संरक्षण के लिए विशेष पहल
पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए एनएचएआई ने परियोजना के डिजाइन में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सामान्यतः राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए 60 मीटर राइट ऑफ वे (ROW) निर्धारित होता है, लेकिन वन क्षेत्र में इसे घटाकर 23 मीटर कर दिया गया है, जिससे पेड़ों की कटाई न्यूनतम रहे।
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर 754 पेड़ों को प्रतिरोपण (ट्रांसप्लांटेशन) के लिए उपयुक्त चिन्हित किया गया है, जिन्हें आगामी मानसून के दौरान स्थानांतरित किया जाएगा।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम
परियोजना बड़कोट, ऋषिकेश और थानो वन रेंज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरती है। इसी कारण वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के सुझावों के आधार पर कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। इनमें एक ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार समर्पित एलीफेंट अंडरपास, ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय और ‘नो हॉर्न’ जोन शामिल हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में इस मार्ग पर 29 वन्यजीवों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत दर्ज की गई है। इसे देखते हुए हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना सहित विशेष अंडरपास बनाए जा रहे हैं।
वैधानिक मंजूरियों के बाद शुरू हुआ कार्य
एनएचएआई ने बताया कि परियोजना सभी आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय अनुमतियां मिलने के बाद शुरू की गई है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट किए जाने के बाद कि पेड़ों की कटाई पर कोई प्रभावी रोक नहीं है, राज्य सरकार ने निर्धारित शर्तों के तहत पेड़ों की कटाई और प्रतिरोपण की अनुमति प्रदान की है।
परियोजना से होंगे ये प्रमुख लाभ
देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच बेहतर संपर्क।
चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सुगम एवं सुरक्षित यात्रा।
यात्रा समय और यातायात जाम में कमी।
बेहतर सड़क सुरक्षा और भविष्य के बढ़ते यातायात का सुचारु संचालन।
वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए आधुनिक अंडरपास।
आधारभूत ढांचा विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल।
एनएचएआई का कहना है कि यह परियोजना आधुनिक सड़क अवसंरचना के साथ पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा को प्राथमिकता देने का एक उदाहरण बनेगी।




