बालप्रहरी बाल लेखन कार्यशाला का चौथा दिन: मेरे सपनों का देहरादून विषय पर बच्चों ने लिखे रोचक निबंध
कार्यशाला में बच्चों को नेताजी की खोज, तोता कहता है, जैसा में कहूं, कितना बड़ा पहाड़, पिज्जा हट खेल कराए गए
– हस्तलिखित पुस्तकों के लिए बच्चों ने निबंध, कहानी, कविता, चुटकुले व पहेलियां आदि तैयार किए
– डॉ शशिकला के संपादन में तैयार दीवार पत्रिका बाल दर्पण का लोकार्पण किया गया
– बालप्रहरी पत्रिका, भारत ज्ञान विज्ञान समिति एवं देहरादून किताब कौतिक आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में अजीम प्रेम जी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजन
देहरादून 18 अक्टूबर।
अल्मोड़ा से प्रकाशित से बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी, भारत ज्ञान विज्ञान समिति एवं देहरादून किताब कौतिक आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में अजीम प्रेम जी फाउंडेशन के सहयोग से दून लाइबेरी देहरादून में आयोजित बच्चों की 5 दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला के चौथे दिन समसामयिक विषयों पर नुक्कड़ नाटक तैयार किया। बच्चों ने समूह गीत “मैं तुमको विश्वास दूं” से दिन की शुरुआत की। “मेरे सपनों का देहरादून” विषय पर बच्चों द्वारा लिखे गए रोचक निबंधों में अपने शहर के प्रति बच्चों की अपेक्षाएं नजर आई।
बालप्रहरी संपादक उदय किरौला ने बच्चों को यात्रा वृत्तांत के बारे बताया और बच्चों ने अपने यात्रा अनुभवों को सुन्दर लेख के रूप में प्रस्तुत किया।
नुक्कड़ नाटक समूह में चयनित बच्चों को 10 मिनट में नाटक “मोबाइल टन टनाटन टन” के लिए अपने संवाद स्वयं तैयार किए।
कार्यशाला में बच्चों को नेताजी की खोज, तोता कहता है, जैसा में कहूं, कितना बड़ा पहाड़, पिज्जा हट खेल कराए गए। आज बच्चों ने अलग-अलग समूह में कार्य किया। नुक्कड नाटक में उदय किरौला, डॉ चंद्रकला भंडारी, बाल कवि सम्मेलन में प्रकाश चंद्र पाण्डेय तथा अदिति जखमोला तथा समूह गीत में डॉ. शशिकला, सुमन सेमवाल तथा दीवार पत्रिका में कुसुम वर्तवाल, धर्मेन्द्र सिंघल ने संदर्भदाता बतौर बच्चों का मार्गदर्शन किया। मुकेश नौटियाल व डा सुरेन्द्र सेमल्टी ने बच्चों को कहानी लेखन की बारीकियां बताई।
कार्यशाला में बच्चों ने अपनी हस्तलिखित पुस्तक के लिए निबंध, कहानी, कतिवा,चुटकुले व पहेलियां आदि तैयार किए। डां शशिकला के संपादन में तैयार दीवार पत्रिका बाल दर्पण का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया।
दून लाइबेरी के प्रो बी के जोशी ने बच्चों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें अपना लक्ष्य निर्धारित करते हुए लक्ष्य प्राप्ति के लिए नियोजित रणनीति तैयार करनी होगी। कार्यशाला की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा निखारने उन्हें मौखिक तथा लिखित अभिव्यक्ति का अवसर देने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएं मील का पत्थर साबित होती हैं।
इस अवसर पर एन रविशंकर, श्याम सरन, विजय भट्ट, योगेंद्र नेगी, संदीप ढैला,डी के पांडेय, सुंदर सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।
कार्यशाला का समापन समारोह 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे दून लाइबेरी में होना है। बालप्रहरी तथा भारत ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा जारी संयुक्त विज्ञप्ति में साहित्य प्रेमियों व शुभचिंतकों से समारोह में उपस्थित होने की अपील की गई है।

