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प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक, राज्यों में होगी राज्य प्रचारक की नई व्यवस्था

RSS शताब्दी वर्ष पर संगठनात्मक ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी

देहरादून, 27 दिसंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संगठनात्मक ढांचे में एक बड़े और ऐतिहासिक परिवर्तन की तैयारी कर रहा है। संघ समय-समय पर परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालता रहा है। पूर्व में संघ की पारंपरिक ड्रेस में बदलाव भी व्यापक चर्चा का विषय रहा था। अब शताब्दी वर्ष के मौके पर संघ की आंतरिक संरचना में व्यापक परिवर्तन प्रस्तावित है, जिसे संगठन के भविष्य के विस्तार और कार्यकुशलता से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव का सबसे बड़ा असर प्रांत प्रचारक व्यवस्था पर पड़ेगा। नई संरचना के तहत अब प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे। संभाग प्रचारकों का कार्यक्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा होगा, जिससे संगठन का कार्य अधिक प्रभावी और ज़मीनी स्तर पर सशक्त बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही प्रत्येक राज्य में एक राज्य प्रचारक की भी व्यवस्था की जाएगी, जो पूरे राज्य में संघ के कार्यों का समन्वय करेंगे।
उत्तर प्रदेश में 6 प्रांत से 9 संभाग का प्रस्ताव
संघ की नई रचना के अनुसार लगभग दो प्रशासनिक मंडलों (कमिश्नरी) को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में वर्तमान में संघ के छह प्रांत—ब्रज, अवध, मेरठ, कानपुर, काशी और गोरक्ष—कार्यरत हैं, जबकि प्रशासनिक रूप से राज्य में 18 मंडल हैं। नई व्यवस्था में इन 18 मंडलों को मिलाकर 9 संभाग बनाए जाएंगे। इसके तहत उत्तर प्रदेश में नौ संभाग प्रचारक और पूरे राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक कार्य करेगा।
फिलहाल प्रदेश में छह प्रांत प्रचारक कार्यरत हैं। इस बदलाव का असर क्षेत्र प्रचारकों की संख्या पर भी पड़ेगा। वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए एक क्षेत्र प्रचारक और पश्चिमी उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के लिए एक अलग क्षेत्र प्रचारक कार्यरत है। नई व्यवस्था में इन दोनों के स्थान पर एक ही क्षेत्र प्रचारक होगा, जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों का कार्य देखेगा, हालांकि दोनों राज्यों के राज्य प्रचारक अलग-अलग होंगे।
राजस्थान उत्तर क्षेत्र में होगा शामिल
नई संरचना के तहत राजस्थान को संघ दृष्टि से उत्तर क्षेत्र में शामिल किया जाएगा, जिसमें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब पहले से शामिल हैं। इस पूरे क्षेत्र के लिए एक ही क्षेत्र प्रचारक नियुक्त किया जाएगा। वर्तमान में देशभर में संघ के 11 क्षेत्र प्रचारक हैं, जो नई व्यवस्था लागू होने के बाद घटकर 9 रह जाएंगे। वहीं पूरे देश में लगभग 75 संभाग प्रचारक होंगे।
संघ की बैठकों की व्यवस्था में भी प्रस्तावित बदलाव
सूत्रों के मुताबिक संघ की बैठकों की संरचना में भी बदलाव प्रस्तावित है। मार्च में आयोजित होने वाली संघ की सबसे बड़ी बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा अब हर वर्ष नहीं होगी। नए निर्णय के अनुसार यह बैठक अब हर तीन वर्ष में नागपुर में आयोजित की जाएगी। हालांकि दीपावली के आसपास होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक पूर्व की तरह हर वर्ष आयोजित होती रहेगी।
2026 में लग सकती है अंतिम मुहर
सूत्र बताते हैं कि संघ की इस नई संरचना पर पिछले 5–6 वर्षों से मंथन चल रहा था। लंबे विचार-विमर्श के बाद अब इन प्रस्तावों पर सहमति बनती दिख रही है। माना जा रहा है कि मार्च 2026 में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इन प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लग सकती है, जिसके बाद वर्ष 2027 से संघ में ये बदलाव ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने लगेंगे।

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