लोक भवन,देहरादून 23 जनवरी,2026 । 

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.) ने शुक्रवार को श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में आयोजित इस भव्य समारोह में राज्यपाल ने उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं तथा सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में अतिथि गृह, टाइप-5 आवास एवं बहुउद्देशीय भवन का लोकार्पण भी किया।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता से अधिक खुशी उनके माता-पिता और शिक्षकों के चेहरों पर दिखाई देती है, जो समाज की सबसे बड़ी उपलब्धि का प्रतीक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज विश्वविद्यालय के 21,664 विद्यार्थियों ने डिग्री प्राप्त की है और वे सभी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय सहभागी बनने जा रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि भारत की युवा और अमृत पीढ़ी वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनमें आत्मविश्वास, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। स्वर्ण पदक कठिन परिश्रम, अनुशासन और निष्ठा का परिणाम होता है, जो सभी के भाग्य में नहीं होता।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि नेतृत्व केवल पद का नाम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भाव है। डिग्री प्राप्त करने के बाद युवा केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि रोजगार सृजक, उद्यमी और नवाचारकर्ता बनें। राज्यपाल ने युवाओं को नशा, भ्रष्टाचार और स्वार्थ से दूर रहते हुए बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए कर्मयोगी बनने का संदेश दिया।
विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शोध पत्रों का प्रकाशन और पेटेंट पंजीकरण विश्वविद्यालय की सशक्त शोध संस्कृति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि शोध और नवाचार ही भारत को विश्व गुरु बनाएंगे और पेटेंट आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। एलुमनाई नेटवर्क और विभिन्न विषयों पर गठित छात्र क्लबों को भी उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक बताया।
राज्यपाल ने कहा कि आज आवश्यकता है कि भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाए—यही 21वीं सदी का सबसे बड़ा अवसर है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि “एकता में शक्ति” भारत की सबसे बड़ी पहचान है।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने उपाधि धारकों को शुभकामनाएं देते हुए उच्च शिक्षा विभाग में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों एवं शैक्षणिक नवाचारों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस अवसर पर विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, परिसर निदेशक प्रो. एम. एस. रावत, कुलसचिव दिनेश चन्द्रा, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, विद्या परिषद एवं कार्य परिषद के सदस्य, गणमान्य अतिथि, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं तथा उनके अभिभावक उपस्थित रहे।



