देहरादून,10 फरवरी 2026 । मुख्यमंत्री
पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में जनपद देहरादून में भू-माफियाओं, अवैध प्लाटिंग एवं सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के विरुद्ध जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में जिलाधिकारी श्री सविन बंसल के निर्देशों पर ग्राम गल्ज्वाड़ी, तहसील देहरादून में बरसाती नाले पर किए गए अतिक्रमण को ध्वस्त कर नाले को अतिक्रमण-मुक्त कराया गया।
उप जिलाधिकारी (न्याय) श्रीमती कुमकुम जोशी के नेतृत्व में जिला प्रशासन की टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर बरसाती नाले को पाटकर बनाई गई लगभग 08 मीटर लंबी पक्की सुरक्षा दीवार को ध्वस्त किया गया। साथ ही मौके पर चल रही अवैध प्लाटिंग एवं निर्माण गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया।
गढ़ी कैंट, घंघोड़ा क्षेत्र के निवासियों द्वारा शिकायत प्राप्त हुई थी कि जितेन्द्र मलिक पुत्र ब्रजपाल, मूल निवासी मुजफ्फरनगर एवं वर्तमान निवासी विजय पार्क, कांवली देहरादून (सेवानिवृत्त सिपाही, पुलिस विभाग) द्वारा ग्राम गल्ज्वाड़ी में लगभग 77 बीघा भूमि में अवैध प्लाटिंग की जा रही है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित व्यक्ति एवं उसके परिजनों के नाम भूमि दर्ज कर अवैध रूप से भू-विक्रय किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त ग्राम यदुवाला में 18 बीघा सरकारी भूमि तथा ग्राम पंचायत गल्ज्वाड़ी के मजरे खाबड़वाला स्थित लगभग 80 बीघा जलमग्न भूमि पर कब्जे के प्रयास का भी आरोप लगाया गया।
जिलाधिकारी के निर्देशों पर राजस्व विभाग द्वारा स्थलीय एवं अभिलेखीय जांच की गई। भू-अभिलेखों के अनुसार खाता-खतौनी संख्या 123 के अंतर्गत खसरा संख्या 1164, 1165, 1166, 1167, 1168, 1169, 1179, 1180, 1184, 1185 एवं 931क सहित कुल रकबा सहखातेदार कुनाल सिंह मलिक पुत्र जितेन्द्र मलिक एवं प्रिंस आनंद पुत्र देवेन्द्र आनंद के नाम दर्ज पाया गया। वहीं खाता-खतौनी संख्या 65 के अंतर्गत खसरा संख्या 933क, रकबा 0.4490 हेक्टेयर, धीरज भाटिया आदि के नाम भूमिधरी में दर्ज है।
स्थलीय निरीक्षण में पाया गया कि खसरा संख्या 933 एवं 1185 के मध्य खसरा संख्या 962क के रूप में दर्ज बरसाती नाला स्थित है। संबंधित व्यक्तियों द्वारा नाले की भूमि पर अवैध कब्जा कर पक्की दीवार का निर्माण कर प्राकृतिक जल प्रवाह को बाधित किया गया था। साथ ही नाले की मूल प्रकृति में भी परिवर्तन पाया गया।
निरीक्षण के दौरान खसरा क्षेत्र में साल प्रजाति के वृक्ष भी पाए गए। वृक्ष पातन के प्रत्यक्ष साक्ष्य मौके पर नहीं मिले। वृक्षों के सूखने अथवा सुखाने के संबंध में वन विभाग द्वारा पृथक जांच की जा रही है।
राजस्व जांच में स्पष्ट हुआ कि दर्ज भूमि पर प्लाटिंग की जा रही थी, किंतु बरसाती नाले की भूमि पर किया गया निर्माण पूर्णतः अवैध था, जिस पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक जलस्रोतों, नालों, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण, अवैध प्लाटिंग एवं भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में कठोर कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी। किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


