
देहरादून 8 मार्च 2026। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा, उत्तराखंड की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट ने प्रदेश की सभी माताओं, बहनों और बेटियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष महिला दिवस की थीम “गिव टू गेन” हमें यह संदेश देती है कि जब समाज महिलाओं को अवसर, सम्मान और सहयोग देता है, तो उसका लाभ पूरे समाज और राष्ट्र को मिलता है।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में नारी को सृजन, त्याग और शक्ति का प्रतीक माना गया है। यदि हम महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के लिए समर्पित होकर कार्य करें, तो इसका प्रतिफल एक सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र के रूप में सामने आता है।
श्रीमती रुचि भट्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, महिला स्वयं सहायता समूहों का विस्तार और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे निर्णयों ने देश की महिलाओं को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास दिया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं सदैव साहस, परिश्रम और नेतृत्व का उदाहरण रही हैं। महिला मोर्चा पूरे प्रदेश में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि महिला मोर्चा द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 और 9 मार्च को प्रदेश के सभी जिलों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से कार्यकर्ता समाज की बहनों और बेटियों के बीच जाकर महिला सशक्तिकरण के संदेश को आगे बढ़ा रही हैं।
श्रीमती रुचि भट्ट ने बताया कि इस वर्ष महिला मोर्चा द्वारा “श्री अन्न (मिलेट्स) और उनसे बने पारंपरिक एवं पौष्टिक व्यंजनों” को भी कार्यक्रमों का प्रमुख विषय बनाया गया है। उन्होंने कहा कि श्री अन्न न केवल हमारे पारंपरिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, बल्कि यह पोषण से भरपूर, पर्यावरण के अनुकूल और किसानों के लिए भी लाभकारी फसल है। महिला मोर्चा के कार्यक्रमों में मिलेट्स से बने विभिन्न व्यंजनों की प्रदर्शनी, जागरूकता कार्यक्रम और संवाद के माध्यम से महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में मंडुवा, झंगोरा, कुट्टू जैसे पारंपरिक अनाज सदियों से हमारी भोजन संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। इनको बढ़ावा देने से एक ओर जहां महिलाओं और परिवारों के स्वास्थ्य को लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसानों और स्वयं सहायता समूहों को भी आर्थिक मजबूती प्राप्त होगी। महिला मोर्चा का प्रयास है कि महिलाएं इन पारंपरिक अनाजों से जुड़े लघु उद्यमों और स्वरोजगार के अवसरों को भी अपनाएं।


