
देहरादून,11 मार्च।
गुरमीत सिंह ने बुधवार को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में “भारतीय सैन्य अधिकारीः राष्ट्र निर्माता के रूप में” विषय पर जेंटलमैन कैडेट्स को संबोधित किया। इस अवसर पर अकादमी के कमांडेंट नगेन्द्र सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी और प्रशिक्षकगण उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सैन्य अकादमी केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि वह पावन स्थान है जहाँ युवा कैडेट राष्ट्र सेवा, अनुशासन और नेतृत्व के मूल्यों को सीखते हैं। उन्होंने कहा कि यहां कैडेट यह समझते हैं कि कर्तव्य को सुविधा से ऊपर, जिम्मेदारी को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर और राष्ट्र को स्वयं से ऊपर रखना ही एक सच्चे सैनिक की पहचान है।
राज्यपाल ने कहा कि सैन्य अधिकारी का दायित्व केवल सीमाओं की रक्षा करना ही नहीं होता, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक अधिकारी अपने नेतृत्व, अनुशासन और आचरण से समाज में विश्वास और स्थिरता की भावना को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी उसकी प्रतिष्ठा होती है, जो उसके व्यवहार, निर्णय क्षमता और अपने जवानों के प्रति संवेदनशीलता से बनती है। एक अच्छा अधिकारी केवल आदेश देने वाला नहीं, बल्कि अपने सैनिकों की बात सुनने वाला, उनकी समस्याओं को समझने वाला और कठिन परिस्थितियों में उनके साथ खड़ा रहने वाला सच्चा नेतृत्वकर्ता होता है।
राज्यपाल ने कैडेट्स को भारतीय इतिहास के महान योद्धाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए गुरु गोबिंद सिंह, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज के साहस, नैतिकता और दूरदृष्टि के उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के सैन्य अधिकारियों को भी इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ युद्ध की प्रकृति और तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, नवाचार और नई रणनीतियों को समझते हुए स्वयं को लगातार अपडेट करना होगा। एक आधुनिक सैन्य अधिकारी को केवल योद्धा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी और विचारशील नेतृत्वकर्ता भी होना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि कूटनीति, सूचना, अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता के समन्वय से मजबूत होती है।
राज्यपाल ने महिला कैडेट्स की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश की प्रगति और सशक्तीकरण का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिला अधिकारी भी अपने समर्पण, क्षमता और नेतृत्व से सेना के गौरव को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को देशवासियों का जो सम्मान और विश्वास प्राप्त है, वह पीढ़ियों से सैनिकों और अधिकारियों द्वारा दिखाए गए साहस, अनुशासन और सेवा भावना का परिणाम है। यही कारण है कि सेना के अधिकारी सेवा के बाद भी विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं।

