देहरादून 19 सितंबर। भाजपा ने हरदा के आगामी कार्यक्रम को पर तंज कसा कि उन्हें बताना चाहिए, क्या यह भ्रष्टाचार के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन है या कांग्रेस में अपना खोया सम्मान वापिस पाने की जोर आजमाइश है? मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री सुरेश जोशी ने कटाक्ष किया कि चुनावों में हार का रिकॉर्ड बनाने वाले हरीश रावत से कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस से जनता छुटकारा पाना चाहती है। लिहाजा ऐसे प्रदर्शनों एवं कार्यक्रमों से 27 के नतीजों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है, कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक समूचे उत्तराखंड में भगवा लहराना तय है।
मीडिया में जारी बयान में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के अंदर चल रहे चुनावी संघर्ष पर तीखा हमला बोला। कहा, हरीश रावत दरअसल कुमाऊं से राजनीति में आगे बढ़े, 1991 से लेकर 2026 तक वह दर्जनों चुनाव लड़े और लगभग अधिकांश में हारे। मात्र एक उपचुनाव, धारचूला विधानसभा से वह मुख्यमंत्री रहते हुए जीते। इससे अंदाज लगा सकते हैं आप कि उनकी स्थिति धरातल पर कितनी मजबूत है। वर्ष 1991 से पूरे कुमाऊँ में भारतीय जनता पार्टी एक तरफ से कह सकते हैं कि एकतरफा जीत रही है। जहाँ तक वर्तमान समय का सवाल है, कांग्रेस पार्टी के अंदर जिस तरह से उनको दरकिनार कर दिया गया है। उससे लगता है कि कांग्रेस पार्टी भी यह समझ चुकी है कि अब हरीश रावत जैसे एक उम्रदराज़ नेता पर दांव नहीं खेला जा सकता है। इसलिए विगत समय से उनको उन्होंने किनारे किया है। लेकिन राजनीति का एक पुरोधा होने के कारण, वह भी अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
उन्होंने मीडिया में इसे शक्ति प्रदर्शन की तरह प्रचारित करने के सवाल पर किया कि इसमें समझना पहले यह पड़ेगा कि क्या भ्रष्टाचार के समर्थन में यह शक्ति प्रदर्शन है या जिस तरह से कांग्रेस पार्टी ने विगत दिनों से रावत जी को एक तरह से दरकिनार किया हुआ है, उसी मान-सम्मान को वापिस लेने की जोर आजमाइश है क्या यह लड़ाई कांग्रेस की एक अंदरूनी लड़ाई है? क्या निकट भविष्य में जो विधानसभा के चुनाव होने हैं, उस विधानसभा चुनाव में भागीदारी को लेकर वर्चस्व की लड़ाई है? वहीं कटाक्ष किया, हरदा कह रहे हैं कि मैं सारे पदों पर नहीं रहूँगा, लड़ाई लड़ूँगा, तो उनके ऊपर तो 2016 में ही जो सीबीआई जाँच प्रारंभ हो गई थी और उसके बाद जो कुछ मामले आए हैं, वह सब सर्वविदित हैं। तब तो ऐसा कोई भी ऐसा कदम उनके द्वारा न उठाया गया, न उसमें यह बातें कही गईं जो आज कही जा रही हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस उनसे किनारा करना चाहती है, छुटकारा पाना चाहती है। लगता है कि उस संदर्भ में एक बड़ी लड़ाई पार्टी के अंदर ही लड़ने का मन हरीश रावत ने बनाया हुआ है।
वहीं स्पष्ट किया कि जहाँ तक भाजपा सरकार का सवाल है, तो किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के विषय सामने आ रहा है उसको किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और निष्पक्ष वह जांच करके उसका फैसला देंगी। जहां तक सवाल है कांग्रेस पार्टी का तो यह सब वहां वर्चस्व की लड़ाई है, यह गुटबाजी की लड़ाई है, ऐसे में जहाँ तक भाजपा का प्रश्न है, वह बहुत मजबूत स्थिति में प्रदेश के अंदर खड़ी है। इसलिए हरदा और कांग्रेस के इस तरह के कार्यक्रम, इस तरह के प्रदर्शन और इस तरह की सोच से भाजपा पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। और भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में एक बहुत बड़े बहुमत से चुनाव जीतने जा रही है।

