द लिटरेरी टेबल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल देहरादून में सजा साहित्य और कला का मंच, लेखकों-बुद्धिजीवियों ने साझा किए इतिहास, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े विचार
‘द लिटरेरी टेबल’ लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल में देवदत्त पटनायक ने रामायण-महाभारत के पात्रों और धार्मिकता पर की बेबाक चर्चा, युवा लेखकों को मिला सम्मान
देहरादून,
27 सितंबर। राजधानी देहरादून में आयोजित दो दिवसीय ‘द लिटरेरी टेबल’ लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल का रविवार को फेयरफील्ड बाय मैरियट के सभागार में समापन हुआ। फेस्टिवल में देश के सुप्रसिद्ध लेखकों, इतिहासकारों, सैन्य विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों ने साहित्य, इतिहास, संस्कृति, स्थापत्य, पर्यावरण और समसामयिक विषयों पर विचार साझा किए। विभिन्न सत्रों में युवाओं और छात्र-छात्राओं को इतिहास एवं साहित्य के विविध पहलुओं को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ भारतीय रिजर्व बैंक, झारखंड के निदेशक प्रेम रंजन अनिमेष ने किया। उन्होंने फेस्टिवल में सम्मानित किए गए स्कूली बच्चों को शुभकामनाएं दीं। फेस्टिवल की डायरेक्टर एवं क्यूरेटर डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन साहित्य और कला से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के साथ ही युवाओं को प्रसिद्ध लेखकों से सीधे संवाद और सवाल-जवाब का अवसर प्रदान करता है।
युवा लेखकों को मिला सम्मान
फेस्टिवल में कई स्कूली विद्यार्थियों को यंग ऑथर सम्मान से सम्मानित किया गया। दून स्कूल के अभिराज सिंघवी और ओएसिस स्कूल के विहान अहलावत को सम्मान मिला। दिल्ली पब्लिक स्कूल, देहरादून के विद्यार्थियों द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘मिस्टीरियस एडवेंचर’ के लिए लाभांश शिरीन, हविश, कृष्णग और रियान जोशी को प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो प्रदान किए गए। वहीं, इसी विद्यालय के दूसरे समूह की पुस्तक ‘हु वाज ही’ के लिए आरभ शुक्ला, अथर्व विश्वकर्मा, नव्यांश शर्मा और आयांश आत्रेय को सम्मानित किया गया।
देवदत्त पटनायक ने रामायण-महाभारत के पात्रों पर रखे विचार
फेस्टिवल के प्रमुख आकर्षणों में मशहूर लेखक देवदत्त पटनायक का सत्र रहा। ‘अ प्लेफुल लुक एट अवर एपिक्स’ विषय पर लेखक किरन भट्ट और मोना वर्मा के साथ हुए संवाद में पटनायक ने धार्मिकता, रामायण और महाभारत के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
उन्होंने महाभारत को ‘पंचम वेद’ बताते हुए कहा कि रामायण और महाभारत को केवल धार्मिक ग्रंथों के रूप में देखने के बजाय लेखक और पात्रों के दृष्टिकोण से भी समझने की आवश्यकता है। उन्होंने सीता और द्रौपदी के चरित्रों की अलग-अलग प्रकृति और उनके माध्यम से दिए गए संदेशों पर चर्चा की।
पटनायक ने अपने चुटीले अंदाज में कहा, “सीता चुप रहती है लेकिन प्रॉपर्टी लेकर रहती है।” उन्होंने कहा कि महाभारत और रामायण के पात्रों को उनके संदर्भ और कथानक के भीतर समझना जरूरी है। इस दौरान उन्होंने दोनों महाकाव्यों की कथा संरचना और पात्रों के माध्यम से सामने आने वाले विभिन्न संदेशों पर विस्तार से चर्चा की।
सैन्य सुरक्षा और ऑपरेशन सिंदूर पर भी हुई चर्चा
छठे सत्र में मॉडरेटर मेजर जनरल आनंद रावत और डॉ. रूबी गुप्ता ने लेखक मेजर जनरल रंजन महाजन से सैन्य सुरक्षा, कश्मीर में सेना की तैनाती, आतंकवाद विरोधी अभियानों और सैन्य शहादत से जुड़े विषयों पर संवाद किया। मेजर जनरल महाजन ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए विभिन्न सैन्य संघर्षों, कश्मीर में सुरक्षा परिस्थितियों तथा कश्मीरी पंडितों से जुड़े घटनाक्रम पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर तथा चीन के साथ सीमा सुरक्षा से जुड़े सैन्य पहलुओं पर भी चर्चा की।
भारतीय स्थापत्य और इतिहास पर ज्ञानवर्धक संवाद
‘हैड इन स्टोन एंड वाटर : आर्किटेक्चरल वंडर्स ऑफ बॉम्बे’ विषयक सत्र में बची करकरिया और देवदत्त पटनायक ने प्रियाक्षी राजगुरु गोस्वामी के साथ स्थापत्य, इतिहास और भारतीय परंपराओं पर चर्चा की। देवदत्त पटनायक ने गंगा-यमुना क्षेत्र और हिमालयी स्थापत्य के साथ दक्षिण भारत के मंदिर स्थापत्य के बीच समानताओं और संबंधों पर अपने विचार रखे। वहीं बची करकरिया ने भारतीय इतिहास एवं परंपराओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं से दर्शकों को अवगत कराया।
सुभाष चंद्र बोस से जुड़े रहस्यों पर चर्चा
‘फाइल्स अनसील्ड : द बोस एनिग्मा डिक्लासिफाइड’ सत्र में चंद्रचूड़ घोष और अनुज धर ने मॉडरेटर पूजा खन्ना तथा डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और रहस्यों पर चर्चा की। पैनल में नेताजी से संबंधित विभिन्न घटनाक्रमों और उनसे जुड़े सवालों को सामने रखा गया।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
फेस्टिवल के अंतिम सत्र ‘आवर लास्ट चांस : द फाइट फॉर मदर अर्थ’ में यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के प्रोफेसर भास्कर वीरा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने देहरादून में बिताए अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने पर्यावरण विषय पर बनाई गई अपनी डॉक्यूमेंट्री भी दर्शकों को दिखाई, जिसके माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों और संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।
फेस्टिवल में ‘आर्किटेक्चर ऑफ सीक्रेट’ और ‘फ्रैक्चर्ड टाइमलाइंस’ सहित विभिन्न सत्रों में इतिहास, भूगोल, साहित्य और कला से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। दर्शकों ने भी विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे, जिनका पैनल में मौजूद वक्ताओं ने जवाब दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में फेस्टिवल डायरेक्टर एवं क्यूरेटर डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी, कोऑर्डिनेटर आर्ट एंड कल्चर पूजा खन्ना, कोऑर्डिनेशन कोलैबोरेशन समृद्धि गुलाटी, कोऑर्डिनेटर ऑपरेशंस एंड लॉजिस्टिक कल्याण साहा, कोऑर्डिनेटर हॉस्पिटैलिटी जयश्री बनर्जी एवं सहजुती साहा, कोऑर्डिनेटर फंड रेजिंग कमेटी सुब्रतो मजूमदार सहित अनुज राणा, गुंजन बलूजा, नरेंद्र सिंह और प्रेरणा चौहान आदि का योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन मनु आहूजा ने किया।


