Breaking Newsउत्तराखंड

विरासत-2026 में स्व. राजा रणधीर सिंह को नम आंखों से दी श्रद्धांजलि, जसबीर जस्सी के गीतों पर झूमे श्रोता

अन्तारा सीनियर लिविंग में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में आरके सिंह और पं. साजन मिश्रा ने साझा कीं यादें, जौनसारी लोकनृत्य और स्मित तिवारी के सरोद वादन ने भी बांधा समां

देहरादून,24 अक्टूबर। रिच संस्था की ओर से आयोजित 15 दिवसीय विरासत कला एवं धरोहर महोत्सव-2026 के दूसरे दिन संगीत, लोकसंस्कृति और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। दिन की शुरुआत अन्तारा सीनियर लिविंग, पुरुकुल में स्वर्गीय राजा रणधीर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। वहीं, शाम को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र के ऑडिटोरियम में सरोद वादन और जौनसारी लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के बाद मशहूर गायक जसबीर जस्सी ने सूफी संगीत से लेकर पॉप और बॉलीवुड गीतों तक अपनी गायकी का जादू बिखेरकर महफिल में चार चांद लगा दिए।

श्रद्धांजलि सभा में रिच संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष तथा विरासत महोत्सव के मुख्य आयोजक आरके सिंह, प्रसिद्ध शास्त्रीय एवं लोक कलाकार पंडित साजन मिश्रा सहित अनेक गणमान्य लोगों ने स्व. राजा रणधीर सिंह को याद किया। इस दौरान उनके जीवन से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए वक्ताओं की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम में राजा रणधीर सिंह के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।

पंडित साजन मिश्रा ने कहा कि स्व. राजा रणधीर सिंह विशाल हृदय के धनी थे। उनके साथ बिताए गए अमूल्य पल और यादें आज भी मन को भावुक कर देती हैं। उन्होंने कहा कि राजा साहब का व्यक्तित्व, उनका हास्य-विनोद और दूसरों को खुश रखने के साथ उनकी मदद करने का स्वभाव हमेशा याद रहेगा।

रिच संस्था के संस्थापक अध्यक्ष आरके सिंह ने कहा कि राजा रणधीर सिंह का लोगों के प्रति गहरा लगाव था और विरासत महोत्सव से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा। उनकी सहज भाषा शैली, हास्य और व्यंग्य से भरी बातें हर किसी का दिल जीत लेती थीं। उनके साथ बिताए गए पल हमेशा स्मृतियों में बने रहेंगे। इस अवसर पर स्व. राजा रणधीर सिंह की पत्नी रानी विनीता सिंह को उनकी सहमति से विरासत महोत्सव का संरक्षक बनाया गया। कार्यक्रम में वन विभाग के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी समीर सिन्हा, स्वरांश मिश्रा और संस्था की संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

### जौनसारी लोकनृत्य ने जीवंत की लोकसंस्कृति

महोत्सव में स्पर्श जनजाति सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के कलाकारों ने जौनसार-बावर की समृद्ध लोकसंस्कृति को मंच पर जीवंत किया। प्रस्तुति की शुरुआत लोक आराध्य महासू देवता की वंदना से हुई, जबकि समापन पारंपरिक हरुल नृत्य के साथ हुआ। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत के सुंदर तालमेल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दल के नायक भगत सिंह राणा और लीडर दुर्गेश राणा के नेतृत्व में कलाकारों ने अपनी ऊर्जा, तालमेल और पारंपरिक अंदाज से जौनसारी लोकनृत्य की खूबसूरती प्रस्तुत की। ढोल, दमाऊ, ढोलक और अन्य वाद्ययंत्रों की गूंज ने महोत्सव में पहाड़ की लोकधुनों का रंग भर दिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से कलाकारों ने जौनसार-बावर की सांस्कृतिक पहचान, लोक आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को सामने रखा।

### स्मित तिवारी के सरोद वादन ने बांधा समां

सांस्कृतिक संध्या में उत्तराखंड के नैनीताल निवासी सरोद वादक स्मित तिवारी ने शास्त्रीय संगीत की मधुर प्रस्तुति से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने राग पीलू में आलाप और झाला प्रस्तुत करते हुए सरोद के सुरों से शास्त्रीय संगीत की गहराई और मधुरता का अनुभव कराया। तबले पर शुभ महाराज ने संगत की। सरोद और तबले के बीच सुर-ताल की जुगलबंदी ने महफिल को खास बना दिया।

पांच वर्ष की उम्र से संगीत सीखने वाले स्मित तिवारी ने ध्रुपद और तबले की शिक्षा अपनी मां छाया तिवारी से शुरू की। बाद में उन्होंने अपने पिता चंद्रशेखर तिवारी और मैहर घराने के सुप्रहत पाल से सरोद की शिक्षा प्राप्त की। उन्हें संगीत नाटक अकादमी की प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता में शीर्ष पुरस्कार सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति और सिटी-एनसीपीए युवा संगीतकार छात्रवृत्ति से सम्मानित स्मित की प्रस्तुति ने श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।

### जसबीर जस्सी के गीतों पर झूमे श्रोता

विरासत महोत्सव की शाम का प्रमुख आकर्षण मशहूर पंजाबी गायक जसबीर सिंह जस्सी रहे। अपनी खास आवाज और अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले जस्सी ने सूफियाना कलाम से शुरुआत करते हुए पॉप और बॉलीवुड गीतों की ऐसी संगीतमय प्रस्तुति दी कि ऑडिटोरियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा।

उन्होंने बुल्ले शाह के सूफी कलाम ‘आवणी सैयों’ से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद सूफी संगीत की आध्यात्मिक अनुभूति से श्रोताओं को जोड़ते हुए पॉप और बॉलीवुड गीतों की ओर रुख किया। ‘अल्लाहु, अल्लाहु, अल्लाहु…’ और ‘मेरा पिया घर आया, ओ राम जी…’ जैसे गीतों ने महफिल में अलग ही रंग भर दिया। गीतों की झड़ी के बीच जस्सी की गायकी पर श्रोता झूमते नजर आए।

उनके साथ संगीतकारों ने भी शानदार संगत की। सनी अली और नवनीत नवी ने कीबोर्ड, सुमित ने ढोल, सनी मेहरा ने बेस गिटार, हर्ष ने ड्रम, सार्थक ने तबला और मोहम्मद कैफ ने कजोन पर संगत की। वहीं, बलबीर बीरा और हरसिमरन सन्नी ने बैकिंग वोकल्स से प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया।

‘दिल ले गई कुड़ी गुजरात दी’ जैसे लोकप्रिय गीत से पहचान बनाने वाले जसबीर जस्सी ने पंजाबी, हिंदी पॉप और सूफी संगीत के मेल से दर्शकों को संगीत की विविधता से रूबरू कराया। उनकी प्रस्तुति ने विरासत की संध्या को यादगार बना दिया। एक ओर स्व. राजा रणधीर सिंह की स्मृतियों ने लोगों को भावुक किया, तो दूसरी ओर लोकनृत्य, सरोद और जस्सी के गीतों ने महोत्सव की शाम को सुरों, संस्कृति और उत्साह से सराबोर कर दिया।

Related Articles

Back to top button