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उत्तराखंड में बिहार की संस्कृति का ध्वजवाहक बिहारी महासभा, 10 नवंबर को देहरादून में होगा भव्य छठ महोत्सव का आयोजन

देहरादून 7 नवंबर 2026। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रवासी बिहारियों की प्रतिनिधि संस्था बिहारी महासभा विगत कई वर्षों से सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। सभा ने आज प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में अपने कार्यों, प्रयासों और आगामी 10 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाले भव्य छठ महोत्सव की विस्तृत जानकारी मीडिया के समक्ष रखी।

प्रेस वार्ता में बिहारी महासभा के अध्यक्ष ललन सिंह, सचिव चन्दन कुमार झा, कोषाध्यक्ष रितेश कुमार, कार्यकारिणी सदस्य सुरेंद्र अग्रवाल एवं आलोक सिंह सहित कार्यकारिणी के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

*बिहारी महासभा: उद्देश्य और पृष्ठभूमि*

अध्यक्ष ललन सिंह ने बताया कि उत्तराखंड में, विशेषकर देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, कोटद्वार सहित अनेक शहरों में बिहार और पूर्वांचल के लाखों लोग निवास करते हैं। ये सभी उत्तराखंड के विकास में मजदूर, किसान, व्यापारी, शिक्षक, आईएएस अधिकारी पीसीएस अधिकारी आईएफएससी अधिकारी , चिकित्सक, अभियंता, सरकारी कर्मचारी, सैनिक और उद्यमी के रूप में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

इतनी बड़ी आबादी के बावजूद लंबे समय तक उनकी कोई संगठित आवाज नहीं थी। अपनी संस्कृति से जुड़े रहने, अपने पर्व-त्योहारों को सामूहिक रूप से मनाने, सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देने और शासन-प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक सशक्त मंच की आवश्यकता महसूस की गई। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए बिहारी महासभा का गठन किया गया।

उन्होंने कहा कि महासभा का मूल मंत्र है – “अपनी माटी से जुड़ाव, प्रवास में एकता और सेवा के माध्यम से समाज का उत्थान।” यह संस्था न केवल पूर्वांचलयों एवं बिहारियों को जोड़ने का कार्य कर रही है, बल्कि बिहार और उत्तराखंड की संस्कृति के बीच सेतु का भी कार्य कर रही है।

*सामाजिक कार्य: सेवा ही सबसे बड़ा धर्म*

सुरेन्द्र अग्रवाल ने महासभा के सामाजिक कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महासभा केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा का भी एक बड़ा केंद्र बन चुकी है।

कोरोना महामारी के कठिन दौर में बिहारी महासभा ने देहरादून में हजारों जरूरतमंद परिवारों को राशन, दवाइयां, ऑक्सीजन सिलेंडर और आर्थिक सहायता पहुंचाई। प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने में भी महासभा ने प्रशासन के साथ मिलकर कार्य किया।

इसके अलावा, किसी प्रवासी मजदूर या गरीब परिवार में मृत्यु होने पर पार्थिव शरीर को बिहार पहुंचाने, आर्थिक सहयोग करने, गंभीर बीमारी में इलाज के लिए मदद करने जैसे कार्य महासभा निरंतर करती आ रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में महासभा हर वर्ष मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करती है। गरीब बच्चों को पुस्तकें, स्कूल फीस में सहायता और करियर मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है। समय-समय पर रक्तदान शिविर, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, नेत्र जांच शिविर का आयोजन भी किया जाता है।

महिला सशक्तिकरण के लिए महासभा की महिला विंग सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। महिलाओं को स्वरोजगार, सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित किया जा रहा है।

*सांस्कृतिक कार्य: लोक संस्कृति का संरक्षण*

कोषाध्यक्ष रितेश कुमार ने बताया कि बिहार की लोक संस्कृति भारत की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। भोजपुरी, मैथिली, मगही भाषा, लोकगीत, झिझिया, जट-जटिन, सोहर, लिट्टी-चोखा की खुशबू को देवभूमि उत्तराखंड में जीवित रखना महासभा की प्राथमिकता है।

हर वर्ष 22 मार्च को बिहार दिवस धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर, बाबू कुंवर सिंह जैसे महापुरुषों को याद किया जाता है। होली मिलन समारोह, लिट्टी-चोखा महोत्सव, लोक गीत-संगीत संध्या जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि महासभा के कार्यक्रमों में गढ़वाली और कुमाऊंनी समाज के भाई-बहन भी बड़े प्रेम से भाग लेते हैं। यह गंगा-जमुनी तहजीब और राष्ट्रीय एकता का सुंदर उदाहरण है।

*छठ महापर्व: आस्था का सबसे बड़ा उत्सव*

प्रेस वार्ता का मुख्य आकर्षण आगामी छठ महोत्सव रहा। पदाधिकारियों ने बताया कि छठ पूजा बिहार की आत्मा है। यह सूर्य उपासना का महापर्व है, जिसमें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह पर्व प्रकृति, जल, सूर्य और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का विशेष महत्व है।

देहरादून में बिहारी महासभा विगत कई वर्षों से छठ पूजा का भव्य आयोजन करती आ रही है। इस वर्ष भी 10 नवंबर 2026, मंगलवार को छठ महोत्सव का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाएगा।

*छठ महोत्सव 2026: तैयारियां जोरों पर*

महासभा ने जानकारी दी कि इस वर्ष देहरादून के प्रमुख छठ घाटों – टपकेश्वर घाट, प्रेमनगर घाट, चंद्रबणी, मालदेवता सहित अन्य स्थानों पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं।

आयोजन की प्रमुख विशेषताएं होंगी:

1. घाटों की विशेष सफाई, सजावट और लाइटिंग
2. सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय, वॉलिंटियर्स की तैनाती
3. हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण
4. भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
5. महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधा, चेंजिंग रूम और बैठने की व्यवस्था
6. पार्किंग और यातायात व्यवस्था
7. चिकित्सा सहायता के लिए एंबुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र

महासभा ने बताया कि इस आयोजन में देहरादून सहित आसपास के क्षेत्रों से 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

*प्रशासन से सहयोग की अपील*

महासभा ने जिला प्रशासन, नगर निगम देहरादून और पुलिस प्रशासन से घाटों की सफाई, पानी की गुणवत्ता, बिजली, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में सहयोग की अपील की है। साथ ही महासभा ने छठ पर्व पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग को भी दोहराया, ताकि श्रद्धालु पूरे श्रद्धा भाव से पर्व मना सकें।

*भविष्य की योजनाएं*

महासभा के पदाधिकारियों ने बताया कि भविष्य में एक स्थायी बिहारी भवन का निर्माण, प्रवासी सहायता हेल्पलाइन केंद्र, रोजगार मेला, कौशल विकास केंद्र और उत्तराखंड के हर जिले में शाखा विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।

अंत में अध्यक्ष ललन सिंह ने सभी मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस आस्था के महापर्व और महासभा के सेवा कार्यों को जन-जन तक पहुंचाएं, ताकि प्रवासी समाज की एकता और संस्कृति को और बल मिल सके।

उन्होंने कहा, “बिहारी महासभा केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक भावना है। हम जहां रहेंगे, वहां अपनी मेहनत से उस धरती की सेवा करेंगे और अपनी संस्कृति की खुशबू भी फैलाएंगे। जय छठी मैया, जय बिहार, जय उत्तराखंड।

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