जेनी ने हरक सिंह रावत पर लगाए दुष्कर्म के आरोप, मामले की दोबारा जांच और बेटे के DNA टेस्ट की मांग
देहरादून 07 नवम्बर ।
उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले चर्चित जेनी प्रकरण एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में आ गया है। शनिवार को देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जेनी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत पर वर्ष 2003 में दुष्कर्म किए जाने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच दोबारा कराने और अपने बेटे का DNA टेस्ट फिर से कराने की मांग की।
जेनी ने दावा किया कि कथित घटना के समय उनकी उम्र 16 वर्ष थी और करीब डेढ़ से दो महीने तक उन्हें अलग-अलग स्थानों और होटलों में ले जाकर उनके साथ जबरदस्ती की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गर्भवती होने के बाद उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और पागलखाने में रखा गया।
पुरानी जांच पर सवाल उठाते हुए जेनी ने कहा कि उनके बेटे के DNA टेस्ट की प्रक्रिया को लेकर उन्हें संदेह है। उनका दावा है कि जांच के दौरान बेटे का सैंपल लिया ही नहीं गया। उन्होंने दोबारा DNA परीक्षण कराकर बेटे को उसके पिता की पहचान और नाम दिलाने की मांग की। साथ ही, मामले में तत्कालीन अधिवक्ता शिवचरण सिंह रावत की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की। जेनी ने वर्ष 2016 में दिल्ली में भी शिकायत दर्ज कराने का प्रयास करने की बात कही।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 24 अक्टूबर को हल्द्वानी में पत्रकारों के सवालों के जवाब में इस प्रकरण का उल्लेख किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में इसे लेकर बयानबाजी तेज हुई थी। इसके बाद हरक सिंह रावत और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप सामने आए थे।
जेनी इससे पहले वीडियो जारी कर नेताओं से उनके नाम पर राजनीति बंद करने की अपील कर चुकी हैं। अब प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उन्होंने एक बार फिर अपने आरोप दोहराते हुए मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना शेष है। ऐसे में पूरे प्रकरण में जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



