अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में मुख्यमंत्री धामी का उद्बोधन: “गीता मानवता के लिए अनंत प्रेरणा का स्रोत”
कुरुक्षेत्र (हरियाणा) देहरादून/29 नवंबर। 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कुरुक्षेत्र, हरियाणा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में प्रतिभाग किया। पावन धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र की इस ऐतिहासिक भूमि पर संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो दिव्य उपदेश दिए, वही श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में मानवता के लिए शाश्वत ज्ञान बनकर आज भी विश्व का पथप्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस भूमि से धर्म, कर्तव्य, सत्य, निष्काम कर्म और आत्मोन्नति का संदेश सदियों से मानव समाज में प्रवाहित होता रहा है। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के लिए हरियाणा सरकार तथा स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया।
“गीता जीवन व्यवहार का दिव्य मार्गदर्शन” — मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन की कालजयी मार्गदर्शिका है। इसमें मनुष्य के आचरण, कर्तव्य, भक्ति, ज्ञान और जीवन व्यवहार का अद्वितीय संकलन है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही वे गीता के उपदेशों का अनुसरण करते हैं और जीवन के हर मोड़ पर गीता के सूत्रों को अपना मार्गदर्शक मानते हैं।
उन्होंने कहा कि समाजहित में किया गया निष्काम कार्य ही सर्वोच्च धर्म है और यह संदेश सदैव उन्हें प्रेरणा देता है कि व्यक्तिगत लाभ, स्वार्थ और अहंकार से ऊपर उठकर राष्ट्र एवं मानवता की सेवा करनी चाहिए।
आधुनिक युग में गीता की प्रासंगिकता और भी बढ़ी — धामी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भौतिकता की दौड़ ने आज मानव जीवन को तनावपूर्ण और जटिल बना दिया है। ऐसे समय में गीता का संदेश और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कहा कि गीता के 18 अध्याय हर व्यक्ति को एक-एक योग की शिक्षा देते हैं और जीवन को संतुलित, उद्देश्यपूर्ण तथा नैतिक आदर्शों के अनुरूप बनाने का मार्ग बताते हैं। विश्व के बड़े विश्वविद्यालयों में गीता पर शोध किए जा रहे हैं और इसे लीडरशिप, मैनेजमेंट व आत्मशांति का ग्रंथ माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता न केवल जीवन जीने की कला सिखाती है, बल्कि चुनौतियों को अवसर में बदलने की शक्ति भी प्रदान करती है।
उत्तराखंड के विद्यालयों में अनिवार्य हुआ गीता पाठ
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता के महत्व को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में प्रतिदिन गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य किया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। हमारी सनातन संस्कृति का गौरव आज विश्वभर में स्थापित हो रहा है।
उत्तराखंड में कठोर कानूनों से सांस्कृतिक संरक्षण — मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड भारत के लिए आस्था और संस्कृति का केंद्र है। इसके मूल स्वरूप और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा हेतु—
जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध कठोर कानून लागू किया गया है,
राज्य में सख्त दंगारोधी कानून बनाया गया है,
10,000 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है,
और देश में पहली बार उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून सुनिश्चित किया गया है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर, अवधेशानंद जी महाराज, कुमार ऋषि, जैन समाज के प्रतिनिधि, स्वामी लोकेश मुनि, बाबा भूपेन्द्र, कपिल पुरी जी महाराज सहित अनेक संत, विद्वान एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री धामी का उद्बोधन गीता के सार्वभौमिक संदेश, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और उत्तराखंड सरकार की निर्णायक नीतियों का प्रभावी प्रतिपादन रहा।
