उत्तराखंडराज्य

यूसीसी का एक साल: एआई सहायता के साथ 23 भाषाओं में उपलब्ध सेवाएं, उत्तराखंड बना तकनीकी उत्कृटता का मॉडल

देहरादून 21 जनवरी।उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को एक वर्ष पूर्ण हो गया है और इस दौरान राज्य सरकार ने इसे तकनीकी उत्कृटता का आदर्श मॉडल बना दिया है। यूसीसी की सभी सेवाएं अब अंग्रेजी के साथ भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध हैं। साथ ही आवेदक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की सहायता से पूरी प्रक्रिया को समझकर स्वयं पंजीकरण भी कर सकता है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी लागू करने से पहले ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पंजीकरण प्रक्रिया बेहद सरल और वेबसाइट पूरी तरह यूजर फ्रेंडली हो, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में आईटीडीए द्वारा यूसीसी की वेबसाइट को असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी सहित कुल 22 भारतीय भाषाओं तथा अंग्रेजी में विकसित किया गया है।
अब आवेदक अपनी पसंदीदा भाषा में न केवल यूसीसी के नियम, प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त कर सकता है, बल्कि उसी भाषा में आवेदन भी कर सकता है। एआई आधारित सहायता प्रणाली के जरिए आवेदकों को पूरी प्रक्रिया समझाने और फॉर्म भरने में मदद मिल रही है, जिससे पंजीकरण और भी आसान हो गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा—
“हमारी सरकार पहले ही दिन से सरलीकरण से समाधान तक के मूलमंत्र पर काम कर रही है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनसामान्य को पंजीकरण में किसी तरह की परेशानी न हो। यूसीसी तकनीकी उत्कृटता का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। यही कारण है कि बीते एक साल में यूसीसी प्रक्रिया को लेकर एक भी शिकायत नहीं आई है।”
राज्य सरकार के इस अभिनव प्रयास से उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां यूसीसी को आधुनिक तकनीक, बहुभाषी सुविधा और एआई आधारित सहायता के साथ सफलतापूर्वक लागू किया गया है। यह पहल न केवल पारदर्शिता बढ़ा रही है, बल्कि आम जनता के लिए सरकारी सेवाओं को सुगम और सुलभ भी बना रही है।

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