देहरादून,19 फरवरी 2026।
पुलिस मुख्यालय उत्तराखण्ड द्वारा प्रदेश के समस्त जनपदों में स्थित माननीय न्यायाधीशों, न्यायालयों एवं न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से कराए गए व्यापक सुरक्षा ऑडिट के क्रम में अब अतिरिक्त सुरक्षा निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य न्यायालय परिसरों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं अभेद्य बनाना है।
पुलिस मुख्यालय ने सभी जनपदों को निर्देशित किया है कि पूर्व में चिन्हित कमियों का त्वरित निराकरण करते हुए नए निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
जारी प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं—
सभी जनपदों में स्थित समस्त न्यायालय परिसरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस/पीएसी बल को आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ तैनात किया जाए।
माननीय न्यायालयों के प्रवेश एवं निकासी द्वारों पर पहचान पत्र के माध्यम से नियंत्रित प्रवेश/निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति का प्रवेश न हो सके।
न्यायालय परिसरों में बैरियर लगाकर एक्सेस कंट्रोल, तथा प्रवेश द्वारों पर आने वाले व्यक्तियों की सघन स्क्रीनिंग की व्यवस्था की जाए। इसके लिए स्थानीय अभिसूचना इकाई एवं अन्य पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।
माननीय न्यायाधीशों एवं न्यायालयों की सुरक्षा ड्यूटी में पूर्व से तैनात सुरक्षा कर्मियों को वर्तमान सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष रूप से सतर्क किया जाए।
आतंकवादी घटनाओं, बम हमलों आदि की आशंका के दृष्टिगत क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) तथा यथासंभव ATS टीमों की न्यायालय परिसरों में तैनाती सुनिश्चित की जाए।
न्यायालय की कार्यवाही प्रारंभ होने से पूर्व प्रातःकाल बम डिस्पोजल दस्ते एवं डॉग स्क्वॉड से एंटी-सैबोटाज चेक कराना अनिवार्य होगा।
न्यायालय परिसरों में लगे सीसीटीवी कैमरों से नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
न्यायालय परिसरों में नियमित पैट्रोलिंग की व्यवस्था की जाए।
ड्यूटी में तैनात सभी कार्मिकों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए।
संभावित सुरक्षा खतरों के दृष्टिगत समय-समय पर मॉक ड्रिल कराई जाए तथा आपातकालीन निकास योजना तैयार की जाए।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि न्यायालयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जनपदों को निर्देशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।


