राज्यसभा में डॉ. नरेश बंसल ने उठाया पंचायतों की आय बढ़ाने का मुद्दा, सरकार ने बताए अहम कदम

नई दिल्ली 01 अप्रैल । भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने संसद में पंचायतों की स्वयं के स्रोतों से राजस्व संग्रहण (ओएसआर) क्षमता से जुड़ा महत्वपूर्ण जनहित का मुद्दा उठाया। उन्होंने पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी।
डॉ. बंसल ने पूछा कि क्या सरकार ने पंचायतों की आय बढ़ाने की क्षमता का आकलन किया है, डिजिटल कर संग्रह प्रणाली लागू की गई है या नहीं, तथा राजस्व बढ़ाने के लिए क्या प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
2022 में विशेषज्ञ समिति गठित, 25,595 करोड़ का संग्रह
मंत्री राजीव रंजन सिंह ने उत्तर में बताया कि वर्ष 2022 में पंचायतों के स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) के आकलन के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी। समिति की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच देश के 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पंचायती राज संस्थाओं ने लगभग 25,595 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति औसत ओएसआर मात्र 59 रुपये प्रतिवर्ष रहा, जबकि राज्यों में भारी असमानता देखी गई—गोवा में यह आंकड़ा 1635 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष तक पहुंचा।
राजस्व बढ़ाने में कई चुनौतियां
सरकार ने माना कि पंचायतों को राजस्व संग्रह में कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें—
पुराने या अपर्याप्त नियम व दिशा-निर्देश
कराधान शक्तियों का सीमित हस्तांतरण
पंचायतों की कर लगाने में अनिच्छा
नागरिकों का कम सहयोग
कमजोर प्रवर्तन तंत्र
डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ शुरू
राजस्व संग्रह को आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म—
कर एवं गैर-कर मांग तैयार करने
ऑनलाइन भुगतान
राजस्व की ट्रैकिंग
जैसी सुविधाएं प्रदान करता है।
इस पोर्टल का हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सफल पायलट परीक्षण किया जा चुका है और अन्य राज्यों को भी इससे जुड़ने का अनुरोध किया गया है।
पंचायतों को मिलेंगे करोड़ों के प्रोत्साहन पुरस्कार
सरकार पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोत्साहन भी दे रही है। संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत ‘आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार’ शुरू किया गया है, जिसमें—
प्रथम पुरस्कार: 1 करोड़ रुपये
द्वितीय पुरस्कार: 75 लाख रुपये
तृतीय पुरस्कार: 50 लाख रुपये
इसके अलावा वित्त आयोग ने भी ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 43,524 करोड़ रुपये के प्रदर्शन आधारित अनुदान की सिफारिश की है, जिसे पंचायतों की आय बढ़ाने से जोड़ा गया है।
पंचायतों की आत्मनिर्भरता पर जोर
सरकार का मानना है कि पंचायतों की वित्तीय मजबूती के बिना ग्रामीण विकास संभव नहीं है। इसी दिशा में डिजिटल व्यवस्था, नीतिगत सुधार और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।




