– इस अवसर पर उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, मानव संसाधन विशेषज्ञों और प्रबंधन के विद्यार्थियों ने भाग लिया
काशीपुर 01 नवंबर।
भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) काशीपुर द्वारा अपने प्रमुख मानव संसाधन (एचआर) कॉन्क्लेव ‘समन्वय 2026’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, मानव संसाधन विशेषज्ञों और प्रबंधन के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कॉन्क्लेव में भविष्य के कार्यक्षेत्र की बदलती प्रकृति, प्रतिभा प्रबंधन की उभरती चुनौतियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव तथा कार्यस्थल की बदलती अपेक्षाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देना तथा भविष्य की कार्यसंस्कृति और रोजगार के बदलते स्वरूप को समझने के लिए विशेषज्ञों के अनुभव एवं दृष्टिकोण साझा करना था।
कॉन्क्लेव का शुभारंभ ‘बियॉन्ड द 9-टू-5: वर्ष 2040 तक रोजगार का स्वरूप क्या होगा?’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा से हुआ। इस सत्र का संचालन ब्लैकरॉक (BlackRock) के टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट मैनेजर एवं आईआईएम काशीपुर के पूर्व छात्र श्री अमेय पचपुते ने किया। चर्चा में तकनीकी प्रगति, कार्यस्थल पर लचीली व्यवस्था, कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं और संगठनों की कार्यप्रणाली में आ रहे बदलावों पर विचार रखे गए।
श्री पचपुते ने शुरुआती स्तर की भर्तियों के बदलते स्वरूप और कार्यस्थल पर लचीलेपन के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया, जिसका युवा पेशेवर रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने में लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि 35 से 45 वर्ष आयु-वर्ग के वर्तमान नेतृत्वकर्ताओं ने भिन्न कॉर्पोरेट परिवेश में कार्य आरंभ किया था, इसलिए स्वतंत्रता और लचीलेपन को लेकर उनकी अपेक्षाएं अलग हैं। उन्होंने कहा, “तकनीकी कौशल के साथ-साथ संगठन की कार्यसंस्कृति के अनुरूप सोच और व्यवहार भी अब चयन में निर्णायक माने जा रहे हैं।”
लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) में एचआर रिवार्ड्स के सीनियर मैनेजर श्री संकल्प नंदा ने भर्ती प्रक्रिया पर एआई के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि एआई भर्ती के मानकों को ऊंचा कर रहा है, जो युवा पेशेवरों को विषय की गहरी समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करता है, जिसे कंपनियां आज भी महत्व देती हैं। उन्होंने कहा, “अब हम अपनी कार्यप्रणाली में एआई को शामिल करने के लिए पहले से कहीं अधिक तैयार हैं।”
प्राज इंडस्ट्रीज (Praj Industries) में लर्निंग एंड ऑर्गनाइजेशनल डेवलपमेंट के डिप्टी जनरल मैनेजर श्री योगेश खटाले ने कहा कि बैंकिंग जैसे पारंपरिक क्षेत्र भी अब 24 घंटे ऑनलाइन सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “एआई आपकी नौकरी नहीं छीनेगा, लेकिन आपके काम करने का तरीका जरूर बदल देगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई कार्य कर सकता है, लेकिन मानवीय निर्णय क्षमता और समस्या सुलझाने की योग्यता का विकल्प नहीं बन सकता। भविष्य में कर्मचारी की पहचान उसके पदनाम से अधिक उसके योगदान से निर्धारित होगी।
स्मार्टक्यू (SmartQ) के चीफ पीपल ऑफिसर श्री नवनीत सुलाखे ने नई पीढ़ी के कर्मचारियों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए समावेशी एवं लचीली कार्यसंस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को उनकी रुचि के अनुरूप कार्य सौंपना ही कुंजी है और आज सबसे अधिक महत्व उत्पादकता तथा परिणामों का है।
प्रोटिविटी (Protiviti) में एचआर के एसोसिएट डायरेक्टर श्री संतोष पाढ़ी ने कहा कि 9 से 5 की पारंपरिक व्यवस्था अब बदल रही है, इसलिए निरंतर सीखना और कौशल को प्रासंगिक बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अब युवा पेशेवरों को भी महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रियाओं में शामिल किया जा रहा है, जिससे सहयोगात्मक कार्यसंस्कृति विकसित हो रही है और पदानुक्रम की दूरी घटी है।
मार्श (Marsh) की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट सुश्री निधि भारद्वाज ने कहा कि मैनेजमेंट ट्रेनी के चयन में बदलावों के अनुरूप ढलने की क्षमता को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि अनुभवी उम्मीदवारों में मानवीय पक्ष और सहानुभूति को। उन्होंने रिवर्स मेंटरिंग की पहल का भी उल्लेख किया, जिसमें युवा कर्मचारी वरिष्ठ प्रबंधकों को नए दृष्टिकोण से अवगत कराते हैं।
रिलायंस पावर की जीएम (एचआर/पीपल स्ट्रैटेजी) सुश्री उर्मिला पाटिल ने कहा कि नए स्नातक संगठन में नए विचार और जिज्ञासा लेकर आते हैं, क्योंकि वे सही सवाल पूछते हैं। उन्होंने प्रबंधकों को युवाओं को समझने और जरूरत पड़ने पर स्पष्ट मार्गदर्शन देने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “निष्ठा को अब संगठन में बिताए वर्षों से नहीं, बल्कि कर्मचारी के काम की गुणवत्ता और योगदान से मापा जाना चाहिए।”
रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड में एचआर एवं लर्निंग एंड डेवलपमेंट लीडर (एचआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) श्री गिरिजेश श्रीवास्तव ने एआई के दौर में व्यावहारिक कौशल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उम्मीदवारों को सलाह दी, “अपने रिज्यूमे में ऐसा कोई कौशल शामिल न करें, जिसके बारे में आप पांच से पंद्रह मिनट तक विस्तार से बात न कर सकें।”
इसके पश्चात कॉन्क्लेव का दूसरा पैनल सत्र ‘बियॉन्ड द चेकबॉक्स: वर्ष 2040 तक रिज्यूमे को प्रभावशाली क्या बनाएगा?’ विषय पर आयोजित हुआ। इसमें भर्ती के बदलते मानदंडों, व्यावहारिक कौशल, कारोबारी समझ, डिजिटल उपस्थिति और संगठनात्मक कार्यसंस्कृति जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सत्र का संचालन गूगल (Google) के सर्च स्पेशलिस्ट श्री विक्रम असोपा ने किया। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों का मूल्यांकन अब पारंपरिक रिज्यूमे की जांच से आगे बढ़कर वास्तविक समस्या समाधान क्षमता, डिजिटल उपस्थिति और संगठन की कार्यसंस्कृति के साथ तालमेल को परखने की दिशा में बदल रहा है।
श्री अर्पण ए. ओमरे ने कहा कि पिछले दो दशकों में रिज्यूमे केवल जानकारी देने वाले दस्तावेज से बदलकर अपनी कहानी प्रस्तुत करने का माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा, “आज रिज्यूमे संभावित नियोक्ताओं के सामने आपकी व्यक्तिगत ब्रांडिंग और डिजिटल पहचान को दर्शाता है।”
बीआईजी एफएम (BIG FM) की वाइस प्रेसिडेंट एवं हेड-एचआर सुश्री संस्कृति रामगड ने कहा कि रिज्यूमे का महत्व बना हुआ है, केवल उसका स्वरूप बदल रहा है। उन्होंने उम्मीदवारों को नौकरी की आवश्यकताओं को समझकर अपनी यात्रा प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की सलाह दी और कहा कि नए उम्मीदवारों के लिए व्यावहारिक अनुभव ही उन्हें अलग पहचान दिला सकता है।
एमफैसिस (Mphasis) में एचआर के एवीपी श्री अर्जुन मोहन ने कहा कि भर्तीकर्ता अब प्रमाणपत्रों से आगे बढ़कर उम्मीदवार की कारोबारी समझ, अनुकूलन क्षमता और समस्या समाधान में योगदान को परखते हैं। चुनौतियों से निपटने की क्षमता और संगठन में मूल्यवर्धन की स्पष्ट कहानी ही उम्मीदवार को विशिष्ट बनाती है।
एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड में एचआर के एवीपी श्री अवनीत सिंह ने कहा कि भर्तीकर्ता और नौकरी तलाशने वाले, दोनों एआई का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए अब रिज्यूमे में लिखे बिंदुओं से आगे उपलब्धियों के पीछे की वास्तविक कहानी और निर्णय की सोच को समझा जाता है। उन्होंने उम्मीदवारों से साक्षात्कार में अपनी कार्यक्षमता और संभावित योगदान को स्पष्ट रूप से रखने का आग्रह किया।
आर सिस्टम्स (R Systems) में हेड सीओई-एचआर श्री शुभम त्रिपाठी ने कहा कि प्रमाणपत्रों की तुलना में वास्तविक कौशल, प्रासंगिक अनुभव और संगठन को दिया जाने वाला योगदान अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने भावनात्मक समझ और अनुशासन के साथ कार्यसंस्कृति के अनुरूप ढलने की क्षमता को भी निर्णायक बताया, “क्योंकि किसी संगठन की संस्कृति केवल उसकी नीतियों से नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले लोगों से बनती है।”
कार्यक्रम का समापन पैनल विशेषज्ञों और प्रबंधन के विद्यार्थियों के बीच संवादात्मक सत्र के साथ हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों को उद्योग जगत के विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर भविष्य के कार्यक्षेत्र, भर्ती की बदलती प्रक्रियाओं और पेशेवर अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिला।
‘समन्वय 2026’ के माध्यम से आईआईएम काशीपुर ने उद्योग जगत के साथ अपने जुड़ाव को और सुदृढ़ करने तथा अकादमिक शिक्षा को व्यावहारिक औद्योगिक अनुभवों से समृद्ध करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। संस्थान का निरंतर प्रयास है कि विद्यार्थियों को बदलते तकनीकी और कारोबारी परिवेश की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम और भविष्य के अनुरूप तैयार किया जाए।



