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आरटीआई से उजागर हुआ बड़ा घोटाला, उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल समिति की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

हरिद्वार 21 दिसंबर। आरटीआई के माध्यम से सामने आए चौंकाने वाले खुलासों ने उत्तराखंड जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार जल संस्थान हरिद्वार द्वारा सुभाष नगर क्षेत्र में पेयजल समिति द्वारा मनमाने ढंग से तय किए गए जल शुल्क को सीधे सरकारी जल बिलों में जोड़कर उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा है। इससे क्षेत्र के स्थानीय निवासी आर्थिक रूप से परेशान हैं, वहीं शासन-प्रशासन की उदासीनता ने पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है।
जानकारी के मुताबिक सुभाष नगर की पेयजल समिति दिनांक 12 अगस्त 2014 को प्रशासक के अधीन आ गई थी। इसके बावजूद समिति से जुड़े तीन व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से पानी की टंकी का संचालन किया जाता रहा और जनता से मनमर्जी से जल शुल्क वसूला जाता रहा। इससे परेशान होकर स्थानीय नागरिकों ने पेयजल समिति के विरुद्ध जिला उपभोक्ता फोरम एवं राज्य उपभोक्ता फोरम, देहरादून में वाद दायर किया। दोनों ही फोरमों ने जनता के हित में निर्णय दिए।
आरोप है कि प्रकरण लंबित रहने के दौरान ही पेयजल समिति ने बिना किसी सक्षम अनुमति के जल शुल्क को 60 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया। इस मनमानी की जानकारी स्थानीय जनता द्वारा जिलाधिकारी को दी गई, जिस पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए।
आरटीआई से यह भी खुलासा हुआ है कि न्यू सुभाष नगर में दो जल पंप स्थापित हैं—एक पेयजल समिति के नाम पर और दूसरा उत्तराखंड जल संस्थान के नाम पर। दोनों पंपों से पूरे सुभाष नगर क्षेत्र में जल आपूर्ति की जाती रही। समिति द्वारा केवल अपने जल पंप का ही बिजली बिल जमा किया गया, जबकि जल संस्थान के नाम पर लगे जल पंप का बिजली बिल वर्षों से जमा नहीं किया गया, जिसके चलते यह बकाया अब लगभग चार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
स्थानीय निवासी राजेश वर्मा ने बताया कि इस पूरे भ्रष्टाचार की जड़ पेयजल समिति है और समिति के सदस्यों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं किरण सिंह ने कहा कि जल शुल्क बढ़ाने से पूर्व स्थानीय निवासियों को सूचना देना आवश्यक था, लेकिन समिति ने बिना किसी अनुमति के शुल्क बढ़ाकर उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाल दिया।
ओमपाल सिंह का कहना है कि प्रशासन को शीघ्र ही इस मामले का संज्ञान लेते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करनी चाहिए तथा जनता के हितों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
आरटीआई से उजागर हुए इन तथ्यों के बाद अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि कब और कैसे इस पूरे मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होती है।

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