देहरादून में बांग्लादेशियों को फर्जी भारतीय पहचान दिलाने का खुलासा, सभी सीएससी की जांच के आदेश

देहरादून 11 जनवरी। राजधानी देहरादून में बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी तरीके से भारतीय पहचान दिलाने के संगठित नेटवर्क का खुलासा होने के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने जिले के सभी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रशासन ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक मानते हुए व्यापक स्तर पर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में संचालित कुछ सीएससी के माध्यम से बांग्लादेशी नागरिकों के आधार कार्ड, पहचान पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे वे न केवल देहरादून में रह रहे थे, बल्कि सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ भी उठा रहे थे।
तकनीकी रूप से वैध, लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह फर्जी
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों के पास से बरामद दस्तावेज देखने में तकनीकी रूप से वैध प्रतीत हो रहे थे, लेकिन उनकी पूरी प्रक्रिया फर्जी पाई गई। जांच में खुलासा हुआ है कि सिस्टम में जानबूझकर गलत पते, फर्जी पारिवारिक विवरण और मनगढ़ंत पहचान फीड की गई थी। कई मामलों में स्थानीय स्तर पर होने वाले सत्यापन को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।
प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि किस सीएससी से कितने फर्जी दस्तावेज जारी हुए और इसके बदले कितनी राशि ली गई। इसके लिए पिछले एक-दो वर्षों के संदिग्ध रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। इस नेटवर्क में सीएससी संचालक, दस्तावेज जुटाने वाले बिचौलिए और पहचान बनवाने वाले विदेशी नागरिक शामिल हो सकते हैं। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
जिन बांग्लादेशी नागरिकों के दस्तावेज फर्जी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ डिपोर्टेशन की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। वहीं, इस फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की गिरफ्तारी भी तय मानी जा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विदेशी नागरिकों को भारतीय पहचान मिलना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। ऐसे फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड, बैंक खाते, राशन कार्ड समेत कई संवेदनशील सुविधाएं ली जा सकती हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है। इसी वजह से इस पूरे मामले को सामान्य अपराध न मानते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रकरण माना जा रहा है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में इस तरह की गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


