संस्कृति को मजबूत किए बिना विकसित राष्ट्र का सपना पूरा नहीं होगा: भगत सिंह कोश्यारी
श्रद्धा पर्व में बोले पूर्व राज्यपाल कोश्यारी—जीवित माता-पिता का सम्मान और उनका आशीर्वाद समाज की सबसे बड़ी जरूरत
मातृ-पितृ कृतज्ञता दिवस पर कोश्यारी ने संस्कृति और गुरुकुल शिक्षा को बताया जरूरी
देहरादून 04 अक्टूबर

। विश्व जागृति मिशन के अपर तुनवाला स्थित आनंद देव लोक आश्रम में विख्यात संत सुधांशु महाराज के आह्वान पर 30वें श्रद्धा पर्व अर्थात मातृ-पितृ कृतज्ञता दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने आध्यात्मिक संबोधन में भारतीय संस्कृति, गुरुकुल शिक्षा प्रणाली और माता-पिता के सम्मान को समाज की मजबूती का आधार बताया।
भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि भारत देश का आधार धर्म और संस्कृति है। उन्होंने कहा कि भारत को धर्मनिरपेक्ष बनाने के प्रयासों के बीच अपनी संस्कृति कमजोर हुई है। संस्कृति को जीवित और मजबूत रखने के लिए गुरुकुल शिक्षा प्रणाली का प्रसार जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुधांशु महाराज गुरुकुल शिक्षा प्रणाली और बाल संस्कार केंद्रों के माध्यम से बच्चों में अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के दौर में स्वाभाविक बुद्धिमत्ता अधिक उपयोगी है, क्योंकि यह भगवान की ओर से मनुष्य को प्रदान की गई बुद्धिमत्ता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प को साकार करने के लिए देश की संस्कृति और संस्कारों को मजबूत करना आवश्यक है। पितरों का आशीर्वाद भी राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ, वरिष्ठ भाजपा नेता गोविंद मोहन, वरिष्ठ उपप्रधान अमरनाथ आहूजा, जितेंद्र खेड़ा, राखी खेड़ा, उत्तराखंड जल संस्थान की पूर्व प्रशासनिक अधिकारी कमला नवानी, ओएनजीसी के पूर्व अधिकारी दिनेश कुमार गुप्ता, कैलाश आहूजा और प्रेम छाबड़ा को स्मृति चिन्ह एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए मिशन के प्रचार मंत्री भूपेंद्र चड्ढा ने कहा कि सुधांशु महाराज के आह्वान पर विश्व जागृति मिशन परिवार से जुड़े एक करोड़ से अधिक भक्तजन प्रत्येक वर्ष दो अक्टूबर को अपने माता-पिता का पूजन-वंदन कर उन्हें उपहार देते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि सुधांशु महाराज का संदेश है कि पितरों के लिए श्राद्ध के साथ-साथ जीवित माता-पिता का सम्मान करना भी आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि मिशन की ओर से देश में चार गुरुकुल और 50 बाल संस्कार केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर बाल संस्कार केंद्र के बच्चों ने आध्यात्मिक मंत्रों का वाचन कर उपस्थित भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी के आश्रम पहुंचने पर महिला मंडल की सदस्यों ने एकरूप वेशभूषा में मुख्य द्वार से सत्संग हाल तक पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम में महामंत्री प्रेम भाटिया, सुरेंद्र वागला, अश्वनी खुराना, विजय खत्री, सुषमा भाटिया, रंजना खत्री, सुमन टंडन, किरण गेरा, सुमन चौधरी, मोहन जोशी, अनिल कुमार, जगदीश पोखरियाल, अनिल आनंद, अनिल बांगा, सचिन गौड़, शौर्य नेगी, राज कुमार कश्यप, रमेश मेहता, विजय भूषण, हुक्म सिंह राणा, हरेंद्र सिंह पुंडीर, रमेश वर्मा, पूनम सोनी, प्रवीण वर्मा, सीमा बांगा, बीना शर्मा, रमन आचार्य, गीता भाटिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं मिशन से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।


