अपराधउत्तराखंड

कॉलेज छात्रों तक महंगी शराब पहुंचाने वाले नेटवर्क की एक और कड़ी पकड़ी, किराये के कमरे से 95 बोतल बरामद

बिधौली-कंडोली क्षेत्र में आबकारी विभाग की छापेमारी, बडवाइजर बीयर की 28 कैन भी मिलीं; चंडीगढ़ में बिक्री के लिए निर्धारित शराब की सप्लाई की जांच तेज

देहरादून 09 अक्टूबर। । राजधानी के बिधौली-कंडोली और प्रेमनगर क्षेत्र में कॉलेज के छात्र-छात्राओं तक महंगी और इंपोर्टेड शराब पहुंचाने के कथित नेटवर्क की एक और कड़ी आबकारी विभाग के हाथ लगी है। विभाग की टीम ने बिशनपुर में दादी की टपरी के पास छापेमारी कर एक किराये के कमरे से 95 बोतल इंपोर्टेड शराब और बडवाइजर बीयर की 28 कैन बरामद की हैं। शराब आदित्य कुमार निवासी उत्तर प्रदेश के कमरे और घर के नीचे खड़ी बिना नंबर की टीवीएस जुपिटर स्कूटी से मिली। बरामद शराब की बोतलों पर ‘फॉर सेल इन चंडीगढ़ ओनली’ अंकित है। इनमें रेड लेबल और वैलेंटाइन जैसे महंगे ब्रांड भी शामिल हैं। आबकारी विभाग इस बरामदगी को बिधौली क्षेत्र में सक्रिय बताए जा रहे शराब सप्लाई नेटवर्क से जोड़कर जांच कर रहा है।
प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त प्रेरणा बिष्ट के निर्देशन में जनपदीय प्रवर्तन दल देहरादून और आबकारी टीम मसूरी ने यह कार्रवाई की। पूछताछ में आदित्य ने कथित तौर पर बताया कि बरामद शराब गर्वित उर्फ विक्रांत की है और उसी ने बिक्री के लिए शराब दी थी। गर्वित फिलहाल जेल में बंद है। आबकारी विभाग के अनुसार, वह बिधौली क्षेत्र में ‘ऑल राउंडर चाचा’ नाम से तीन ढाबे संचालित कर रहा था। पेट्रोलियम कॉलेज के आसपास और हॉस्टलों में शराब की डिलीवरी किए जाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने शराब के भंडारण की सूचना पर छापा मारा था।
डेढ़ महीने की जांच के बाद गर्वित ने किया था आत्मसमर्पण
इस मामले में गर्वित उर्फ विक्रांत की भूमिका सामने आने के बाद आबकारी विभाग ने जांच तेज कर दी थी। इससे पहले 25 अगस्त को दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ और अन्य सुरागों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश शुरू की गई। इसी प्रकरण में गर्वित की मां को भी कथित तौर पर अवैध शराब की बिक्री और उसे अपने कब्जे में रखने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
विभाग के मुताबिक, पिछली कार्रवाई के दौरान गर्वित फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पहले देहरादून जिला न्यायालय में जमानत याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद नैनीताल हाईकोर्ट से भी उसे राहत नहीं मिली। लगातार कार्रवाई और जांच के बीच गर्वित ने सात अक्टूबर को देहरादून के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया। आठ अक्टूबर को आदित्य के कमरे से शराब की बरामदगी को विभाग इसी नेटवर्क की अगली कड़ी मान रहा है।
रेट कार्ड से होम डिलीवरी तक, सुनियोजित तरीके से चल रहा था कथित कारोबार
आबकारी विभाग की जांच में शराब की बिक्री और डिलीवरी के लिए व्यवस्थित तरीके से ग्राहकों तक पहुंच बनाने की बात सामने आई है। विभाग के अनुसार, शराब के ब्रांड, कीमत और उपलब्धता का रेट कार्ड हॉस्टल तथा पीजी में रहने वाले छात्र-छात्राओं तक पहुंचाया जाता था। इसके माध्यम से ग्राहक अपनी पसंद के ब्रांड और कीमत के आधार पर शराब का ऑर्डर दे सकते थे। इस तरह शैक्षणिक संस्थानों के आसपास रहने वाले युवाओं को कथित तौर पर ग्राहक बनाया गया था।
वाट्सऐप ग्रुप से होती थी डिलीवरी करने वालों की निगरानी
विभाग के मुताबिक, गर्वित ने शराब की बिक्री और डिलीवरी के लिए एक वाट्सऐप ग्रुप बनाया था। इसमें डिलीवरी करने वाले युवाओं को सुबह और शाम अपनी सेल्फी तथा लोकेशन साझा कर उपस्थिति दर्ज करानी पड़ती थी। इस व्यवस्था के माध्यम से उनकी गतिविधियों और काम पर निगरानी रखी जाती थी।
जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि गर्वित कॉलेज के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को रुपये का लालच देकर शराब की होम डिलीवरी के काम में लगाता था। कुछ युवाओं को डराने-धमकाने की बात भी विभाग की ओर से कही गई है। विभाग का दावा है कि इस काम के लिए कुछ युवाओं को हरियाणा से भी लाया गया था।
करीब 10 बिना नंबर की स्कूटी से सप्लाई का आरोप
शराब की डिलीवरी के लिए बिना नंबर प्लेट वाले दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। आबकारी विभाग के अनुसार, क्षेत्र में करीब 10 बिना नंबर की स्कूटी सक्रिय की गई थीं, जिनके जरिये हॉस्टल और पीजी तक शराब पहुंचाई जाती थी। पिछले दो महीनों में विभाग गर्वित से जुड़ी चार ऐसी स्कूटी आबकारी अधिनियम की धारा 72 के तहत जब्त कर चुका है। ताजा कार्रवाई में भी बिना नंबर की टीवीएस जुपिटर स्कूटी से शराब बरामद हुई है।
एलएलबी की पढ़ाई के लिए आया था देहरादून
आबकारी विभाग के अनुसार, गर्वित मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है। वह वर्ष 2022 में देहरादून की एक निजी यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई करने आया था। आरोप है कि पढ़ाई के दौरान उसने दिल्ली और हरियाणा से शराब लाकर बिधौली और प्रेमनगर क्षेत्र में रहने वाले छात्र-छात्राओं तक इसकी सप्लाई शुरू कर दी। धीरे-धीरे इस गतिविधि का दायरा बढ़ा और ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए रेट कार्ड, वाट्सऐप के माध्यम से ऑर्डर तथा डिलीवरी के लिए युवाओं की टीम का इस्तेमाल किया जाने लगा। इसी दौरान उसने बिधौली क्षेत्र में ‘ऑल राउंडर चाचा’ नाम से तीन ढाबे भी शुरू किए। बाद में उसका परिवार भी हरियाणा से देहरादून आकर रहने लगा।
चंडीगढ़ में बिक्री के लिए निर्धारित शराब की सप्लाई की जांच
आबकारी विभाग के अनुसार, गर्वित हरियाणा और चंडीगढ़ से शराब लाकर देहरादून में बेचता था। आठ अक्टूबर को बरामद बोतलों पर ‘फॉर सेल इन चंडीगढ़ ओनली’ लिखा होना जांच का अहम बिंदु है। अब विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि शराब कहां से खरीदी गई, उसे देहरादून तक कैसे पहुंचाया गया और इस गतिविधि में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही, कॉलेजों और हॉस्टलों तक शराब पहुंचाने के कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
आबकारी टीम में ये अधिकारी और कर्मचारी रहे शामिल
कार्रवाई में आबकारी निरीक्षक मसूरी दिवाकर चौधरी, आबकारी निरीक्षक प्रवर्तन दल देहरादून जयवीर सिंह, उप आबकारी निरीक्षक उमराव सिंह राठौर, आशीष प्रकाश, अर्जुन सिंह, विजय कोठियाल तथा हेड कांस्टेबल राकेश नाथ, गोविंद सिंह, हेमंत, नौशाद और रीनू कुमार शामिल रहे।

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