देहरादून 04 नवंबर।
राजधानी देहरादून के मोहब्बेवाला क्षेत्र में बुधवार शाम हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। सहारनपुर की ओर से आ रहा यूरिया से भरा तेज रफ्तार कंटेनर अनियंत्रित होकर एक कार के ऊपर पलट गया। भारी-भरकम कंटेनर के नीचे कार पूरी तरह दब गई और उसमें सवार लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। इस हृदयविदारक हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार लोगों की जान चली गई, जबकि छह वर्षीय मासूम चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गया।
इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही, उनकी रफ्तार, यातायात नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर शहर की सड़कों पर दौड़ते भारी वाहनों की गति और सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन कर रहा है? क्या हादसों के बाद जांच और मुआवजे की औपचारिकता ही शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी रह गई है? चार लोगों की मौत के बाद ये सवाल अब जवाब मांग रहे हैं।
मृतकों की पहचान 63 वर्षीय किरण कपूर, उनके 38 वर्षीय बेटे मिश्रेष कपूर, 38 वर्षीय बहू निशा आनंद कपूर और परिवार के साथ मौजूद चालक नीरज के रूप में हुई है। हादसे में परिवार का छह वर्षीय बेटा माहेर कपूर सुरक्षित बच गया। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत ने इस दुर्घटना को और भी दर्दनाक बना दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार परिवार मूल रूप से सहारनपुर का निवासी था और देहरादून में भी उसका घर है।
**कंटेनर के नीचे दबी कार, घंटों चला रेस्क्यू**
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। कंटेनर के नीचे बुरी तरह दबी कार में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया गया। दुर्घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार पूरी तरह भारी वाहन के नीचे दब गई थी। घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई।
**एक्सप्रेसवे पर लगा वाहनों का लंबा जाम**
हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर यातायात व्यवस्था भी चरमरा गई। सड़क के दोनों ओर कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं। राहत एवं बचाव कार्य के साथ यातायात को सुचारु बनाए रखना पुलिस के लिए चुनौती बन गया।
**सिर्फ जांच नहीं, जवाबदेही भी तय हो**
मोहब्बेवाला की यह दुर्घटना केवल चार लोगों की मौत का मामला नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर परीक्षा भी है। भारी वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण, चालकों की निगरानी, यातायात नियमों का पालन और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। हादसे के बाद कारणों की जांच होना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर जिम्मेदारी तय हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
फिलहाल पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। लेकिन इस हादसे ने शासन-प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है—आखिर सड़क पर चलने वाले आम नागरिकों की जान की सुरक्षा कब सर्वोच्च प्राथमिकता बनेगी?


