उत्तराखंडधर्म/संस्कृति

धनतेरस केवल धन-संपत्ति का नहीं, आरोग्य और निरोगी जीवन का भी पर्व : डॉ. ललित तिवारी

समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे भगवान धन्वंतरि, आयुर्वेद के जनक के रूप में होती है पूजा

संवाददाता। ललित जोशी,

नैनीताल 06 नवम्बर। धनतेरस का पर्व भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखता है। सामान्य रूप से इसे धन, वैभव और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन वास्तव में यह पर्व भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक तथा देवताओं का वैद्य माना जाता है। यह पर्व हमें संदेश देता है कि जीवन में भौतिक संपन्नता के साथ उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी काया का होना भी सबसे बड़ा धन है।

डीएसबी परिसर नैनीताल के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं लेखक डॉ. ललित तिवारी के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस तिथि को धनत्रयोदशी अथवा धनतेरस कहा जाता है। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार माना जाता है। उनके प्राकट्य का उद्देश्य संसार के कल्याण और मानव जीवन को रोगमुक्त बनाने के लिए आयुर्वेद का ज्ञान प्रदान करना था।

डॉ. तिवारी बताते हैं कि समुद्र मंथन से प्रकट होने के समय भगवान धन्वंतरि के चार हाथों में अमृत कलश, औषधियां, शंख और चक्र विद्यमान थे। उनके हाथों में अमृत कलश होना जीवन में स्वास्थ्य, दीर्घायु और आरोग्य के महत्व को दर्शाता है। इसी महत्व को देखते हुए भारत सरकार द्वारा धनतेरस अर्थात धन्वंतरि जयंती को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

**धातु के बर्तन खरीदने की परंपरा का भी है धार्मिक महत्व**

धनतेरस पर सोना, चांदी और पीतल सहित विभिन्न धातुओं के बर्तन खरीदने की परंपरा प्राचीन मान्यताओं से जुड़ी है। मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के समय अपने हाथों में पीतल का अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी के प्रतीक स्वरूप इस दिन धातु के बर्तन खरीदना शुभ माना जाने लगा। यह परंपरा सुख-समृद्धि और मंगलकामना का प्रतीक है।

**लक्ष्मी-कुबेर पूजन और यमदीपदान का विशेष महत्व**

धनतेरस की संध्या को माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की मंगलकामना के लिए घर के मुख्य द्वार पर यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा है, जिसे यमदीपदान कहा जाता है। इस दिन आर्थिक संपन्नता के प्रतीक के रूप में साबुत धनिया खरीदना तथा घर से दरिद्रता और नकारात्मकता दूर करने के भाव से झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है।

डॉ. तिवारी के अनुसार, धनतेरस का वास्तविक संदेश केवल धन-संपत्ति अर्जित करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य रूपी अमूल्य धन की रक्षा करना भी है। स्वस्थ शरीर ही जीवन के सभी सुखों और उपलब्धियों का आधार है। इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कर उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरोगी जीवन की कामना की जाती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को सर्वोच्च संपदा माना गया है। इसी भाव को संस्कृत के इस श्लोक में व्यक्त किया गया है—

**”आरोग्यं परमं भाग्यं, स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥”**

अर्थात आरोग्य सबसे बड़ा सौभाग्य है और स्वस्थ शरीर ही जीवन के सभी उद्देश्यों की पूर्ति का साधन है।

अंत में डॉ. ललित तिवारी ने कामना की कि भगवान धन्वंतरि की कृपा और मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं खुशहाली बनी रहे।

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