
देहरादून/भराड़ीसैंण 10 मार्च। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा में तीन पूर्व विधायकों—स्वर्गीय दिवाकर भट्ट, स्वर्गीय राजेश जुवांठा और स्वर्गीय बलवीर सिंह नेगी—को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को उत्तराखंड के राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में जनसेवा, संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने देवप्रयाग के पूर्व विधायक स्वर्गीय दिवाकर भट्ट को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्षशील व्यक्तित्व और निर्भीक नेतृत्व उत्तराखंड की जनराजनीति की सशक्त पहचान रहा है। टिहरी जनपद के बडियारगढ़ क्षेत्र के सुपार गांव में 1946 में जन्मे भट्ट जी ने कम उम्र से ही जन आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान अग्रिम पंक्ति में रहकर आंदोलन को नई दिशा दी। उन्हें राजनीति में “फील्ड मार्शल” के नाम से भी जाना जाता था। वर्ष 2007 में वे देवप्रयाग से विधायक चुने गए और बाद में राज्य सरकार में राजस्व, भू-प्रबंधन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा सैनिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। उनका निधन 25 नवंबर 2025 को हुआ।
मुख्यमंत्री ने पुरोला के पूर्व विधायक स्वर्गीय राजेश जुवांठा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे युवा, ऊर्जावान और जनसरोकारों के प्रति समर्पित जनप्रतिनिधि थे। 7 जुलाई 1977 को उत्तरकाशी जनपद के पुरोला क्षेत्र में जन्मे जुवांठा जी ने 2002 से 2007 तक क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में कार्य किया और वर्ष 2007 में पुरोला से विधायक निर्वाचित हुए। उन्होंने सदन में क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाया और विभिन्न समितियों में सक्रिय भूमिका निभाई। 22 दिसंबर 2025 को हृदयगति रुकने से 48 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
मुख्यमंत्री ने टिहरी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय बलवीर सिंह नेगी को भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन जनसेवा, सादगी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहा। 8 दिसंबर 1947 को टिहरी गढ़वाल के ग्राम थाती में जन्मे नेगी जी लंबे समय तक क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे। वे भिलंगना क्षेत्र से दो बार ब्लॉक प्रमुख रहे और वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर टिहरी से विधायक निर्वाचित हुए। बाद में 2002 में घनसाली से तथा 2007 में पुनः विधायक चुने गए। उन्हें गढ़वाल मंडल विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य करने का अवसर मिला। 26 जनवरी 2026 को 78 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
मुख्यमंत्री ने सदन की ओर से तीनों दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन समाज और प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

