मानव तस्करी के खिलाफ छह राज्यों की पुलिस एक मंच पर, साझा रणनीति पर मंथन
पंतनगर में राज्य स्तरीय सम्मेलन में 134 प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास पर जोर
देहरादून,
09 अक्टूबर। मानव तस्करी जैसे संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने, अपराधियों के अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने और पीड़ितों के सुरक्षित बचाव व पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखण्ड पुलिस ने पंतनगर में राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन आयोजित किया। शुक्रवार को गांधी हॉल ऑडिटोरियम में आयोजित इस सम्मेलन में उत्तराखण्ड समेत छह राज्यों के पुलिस अधिकारियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों, सरकारी विभागों, अभियोजन अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों और बाल कल्याण समितियों के कुल 134 प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।
गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित सम्मेलन का उद्देश्य मानव तस्करी की रोकथाम के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करना, पीड़ितों की समयबद्ध पहचान और सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित करना तथा दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई को गति देना रहा।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड वी. मुरुगेशन ने कहा कि मानव तस्करी एक गंभीर और संगठित अपराध है, जिससे निपटने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों, केंद्रीय एजेंसियों और सामाजिक संगठनों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, कानूनी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन करने तथा पीड़ितों के संरक्षण एवं पुनर्वास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
छह राज्यों के प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव
सम्मेलन में उत्तराखण्ड के अतिरिक्त पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने मानव तस्करी से जुड़े मामलों, अपराधियों के तौर-तरीकों और जांच के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार साझा किए। विभिन्न एजेंसियों की सहभागिता से मानव तस्करी के बदलते स्वरूप, संगठित गिरोहों की कार्यप्रणाली तथा अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध समन्वित कार्रवाई करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कुल प्रतिभागियों में उत्तराखण्ड पुलिस के 21 राजपत्रित और 73 अराजपत्रित अधिकारी-कर्मचारी, अन्य राज्यों के छह पुलिस अधिकारी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों एवं केंद्रीय एजेंसियों के चार राजपत्रित अधिकारी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के आठ कार्मिक शामिल रहे। इसके अलावा सिविल प्रशासन, अभियोजन, श्रम एवं बाल कल्याण विभागों के 14 अधिकारियों तथा गैर-सरकारी संगठनों एवं बाल कल्याण समितियों के आठ प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
विशेषज्ञों ने दिए प्रभावी जांच और अभियोजन के सुझाव
सम्मेलन में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक, एनडीआरएफ एवं टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) से जुड़े विशेषज्ञ पी.एम. नायर, एसडब्ल्यूआरसी बनबसा के संस्थापक एवं सचिव जनक बहादुर चन्द, मदद फाउंडेशन के संस्थापक एवं बाल संरक्षण विशेषज्ञ राजेश मणि, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक एवं शक्ति वाहिनी के संस्थापक रविकान्त, संयुक्त निदेशक (विधि) जी.सी. पंचोली और सहायक अभियोजन अधिकारी अपर्णा अवस्थी सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
विशेषज्ञों ने आधुनिक विवेचना तकनीकों, इलेक्ट्रॉनिक एवं अन्य साक्ष्यों के प्रभावी संकलन, साक्ष्य आधारित जांच, अभियोजन की गुणवत्ता में सुधार और पीड़ितों की समयबद्ध पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर सुझाव दिए। साथ ही बचाव के बाद पीड़ितों को आवश्यक कानूनी एवं सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।
अपराधियों के नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए समन्वय जरूरी
सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मानव तस्करी के मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। अपराधियों के पूरे नेटवर्क, उनकी कार्यप्रणाली और नए तौर-तरीकों की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करना जरूरी है। इसके लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान तथा संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की गई।
पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल, जांच की गुणवत्ता में सुधार, उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित उपयोग और कानूनी प्रक्रिया का प्रभावी अनुपालन भी चर्चा के प्रमुख विषय रहे। अधिकारियों ने कहा कि समयबद्ध कार्रवाई और मजबूत समन्वय से ऐसे मामलों में दोषियों को कानून के दायरे में लाने में मदद मिलेगी।
पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता
सम्मेलन में पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि मानव तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई के साथ पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, उनकी गरिमा एवं सुरक्षा बनाए रखना और आवश्यक कानूनी तथा सामाजिक सहायता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों की समय पर पहचान, सुरक्षित बचाव, बाल कल्याण समिति एवं सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष नियमानुसार प्रस्तुत करने और पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। इस दिशा में पुलिस, सरकारी विभागों, बाल कल्याण संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने की आवश्यकता बताई गई।
हरिद्वार पुलिस ने साझा कीं दो महत्वपूर्ण केस स्टडी
सम्मेलन में हरिद्वार पुलिस ने मानव तस्करी एवं अपहरण से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों की जानकारी साझा की। पहले मामले में 13 वर्षीय अपहृत बालिका को बिहार से सकुशल बरामद किया गया और पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। दूसरे मामले में अपहृत चार माह के शिशु को सुरक्षित बरामद किया गया।
इन दोनों मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, त्वरित जांच और अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। केस स्टडी के माध्यम से बताया गया कि संवेदनशील मामलों में शुरुआती घंटों के दौरान सक्रियता, वैज्ञानिक विवेचना और विभिन्न पुलिस इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल पीड़ितों की सुरक्षित बरामदगी में निर्णायक साबित हो सकता है।
11 पुलिसकर्मी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित
सम्मेलन के समापन सत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। पंतनगर में आयोजित यह सम्मेलन मानव तस्करी के विरुद्ध विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, सरकारी विभागों और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा पीड़ितों के बचाव, संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।
सम्मेलन में अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन के साथ पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण अनंत शंकर ताकवाले, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती, पुलिस उपमहानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था धीरेंद्र गुंज्याल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंहनगर अजय गणपति सहित चार जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक तथा विभिन्न जनपदों की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के नोडल अधिकारी और प्रभारी मौजूद रहे।


