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टीबी उन्मूलन के लिए जांच, उपचार, पोषण और जनभागीदारी जरूरी: राज्यपाल गुरमीत सिंह

एम्स ऋषिकेश में टीबी पर राष्ट्रीय सम्मेलन एवं नीति संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए राज्यपाल, ड्रोन तकनीक से दूरस्थ क्षेत्रों तक दवाएं पहुंचाने की पहल को सराहा

ऋषिकेश, 09 अक्टूबर। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शुक्रवार को एम्स ऋषिकेश में आयोजित टीबी पर राष्ट्रीय सम्मेलन एवं नीति संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल चिकित्सा और दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए समय पर जांच, सही उपचार, पोषण, जनजागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रभावी उपयोग कर यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक टीबी मरीज को समय पर उचित उपचार उपलब्ध हो सके।
राज्यपाल ने कहा कि टीबी केवल एक चिकित्सकीय समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। यह बीमारी मरीज के स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ उसके परिवार, आजीविका और सामाजिक जीवन पर भी असर डालती है। इसलिए टीबी से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग का भाव रखना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान, निक्षय पोषण योजना, निक्षय मित्र पहल और टीबी मुक्त पंचायत जैसे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनभागीदारी ही टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, लंबी दूरियां और मौसम संबंधी चुनौतियां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को प्रभावित करती हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीक इन बाधाओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। राज्यपाल ने एम्स ऋषिकेश द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों में टीबी की दवाएं पहुंचाने के लिए ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को प्रेरक पहल बताते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान, तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के समन्वय से दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाया जा सकता है।
मरीज की पहचान और उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए
राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता का आकलन केवल जांचों की संख्या या मशीनों की उपलब्धता से नहीं किया जाना चाहिए। इसका वास्तविक पैमाना यह होना चाहिए कि मरीज की पहचान कितनी जल्दी हुई और उसका उपचार कितनी शीघ्रता से शुरू किया जा सका। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब उससे लोगों का जीवन सुरक्षित और बेहतर बन सके।
उन्होंने टीबी उन्मूलन में आशा एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये सभी समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच मजबूत कड़ी हैं। टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक और भ्रांतियों को समाप्त करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को दूरी और भेदभाव नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और सहयोग की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय सम्मेलन के निष्कर्ष ठोस कार्ययोजना में बदलें
राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श ठोस कार्ययोजना और प्रभावी नीतियों में परिवर्तित होगा। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान कर सकता है। यहां विकसित होने वाले प्रभावी स्वास्थ्य मॉडल देश के अन्य पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।
कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह, पॉलिसी रेजीलेंस फाउंडेशन के निदेशक नंदीश आर. पैठानी, आयोजन अध्यक्ष डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. गिरीश सिंधवानी सहित अन्य चिकित्सक एवं संबंधित विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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