**उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के सौजन्य से डीएसबी परिसर में हुआ आयोजन, विद्यार्थियों को नियमित पुस्तक अध्ययन के लिए किया प्रेरित**
**संवाददाता: ललित जोशी**
नैनीताल 03 नवम्बर
। मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बीच नई पीढ़ी में पुस्तकों के प्रति घटती रुचि को देखते हुए सरोवर नगरी नैनीताल स्थित डीएसबी परिसर में पुस्तक दान महोत्सव का आयोजन किया गया। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के सौजन्य से आयोजित इस महोत्सव में विद्यार्थियों को पुस्तकों के महत्व से अवगत कराने के साथ ही उनमें नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने का संदेश दिया गया। महोत्सव के दौरान प्रतिष्ठित लेखकों की लगभग 3000 पुस्तकें निःशुल्क वितरित की गईं।
कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि इंटरनेट के इस दौर में सूचनाओं की उपलब्धता तो बढ़ी है, लेकिन पुस्तकों का महत्व आज भी बरकरार है। इंटरनेट पर उपलब्ध प्रत्येक जानकारी की प्रमाणिकता सुनिश्चित नहीं होती, जबकि पुस्तकों को लेखन, संपादन और प्रूफ रीडिंग जैसी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद प्रकाशित किया जाता है। ऐसे में पुस्तकों के माध्यम से प्राप्त ज्ञान अधिक व्यवस्थित, विश्वसनीय और संदर्भ आधारित होता है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की प्रवृत्ति कम होना चिंता का विषय है। नई पीढ़ी को कम उम्र से ही पुस्तकों से जोड़ना और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करना जरूरी है। पुस्तक दान महोत्सव इसी दिशा में एक सार्थक पहल है। उन्होंने विद्यार्थियों को सिविल सेवा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में प्रमाणिक पुस्तकों और मूल स्रोतों के अध्ययन को प्राथमिकता देने की सलाह दी। साथ ही कहा कि विद्यार्थियों को पुस्तक के लेखक, स्रोत और संदर्भ पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नवीन चंद्र लोहानी ने कहा कि इंटरनेट और पुस्तकें एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति के पूरक माध्यम हैं। इंटरनेट जहां त्वरित जानकारी उपलब्ध कराता है, वहीं पुस्तकों के अध्ययन से विषय की गहरी और क्रमबद्ध समझ विकसित होती है। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ अपने नोट्स तैयार करने की आदत भी डालनी चाहिए। उन्होंने भविष्य में भी पुस्तक मेलों और पुस्तक दान जैसे आयोजनों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में निदेशक प्रो. संजय पंत ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि कुलसचिव रितेश साह ने आभार व्यक्त किया। संचालन विजिटिंग प्रोफेसर एवं निदेशक डॉ. ललित तिवारी ने किया। भारतीय परंपरा के अनुरूप पुस्तक दान के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी को प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। वहीं दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को शॉल ओढ़ाकर और गणेश जी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया।
महोत्सव का शुभारंभ राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और कुलगीत के साथ हुआ। इस अवसर पर ठाकुर देव सिंह बिष्ट की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया तथा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए गए। शोध निदेशक डॉ. मनोज कुमार आर्य और चीफ प्रॉक्टर प्रो. हरीश बिष्ट ने कुलपति प्रो. लोहानी एवं कुलसचिव को शोध कार्य से संबंधित ‘मोथ एटलस’ तथा ‘गोल्डन बर्डविंग’ के चित्र भेंट किए। छात्र महासंघ अध्यक्ष यतेंद्र पांडे ने दोनों कुलपतियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
इस अवसर पर प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. महेंद्र राणा, प्रो. दीपक पालीवाल, प्रो. अर्चना श्रीवास्तव, डॉ. सुषमा टम्टा, डॉ. नीलू, डॉ. मोहित रौतेला, डॉ. दीपक मेलकानी, डॉ. अनीता पांडे, प्रो. आशीष तिवारी, डॉ. प्रभा पंत, डॉ. हेम जोशी, डॉ. अशोक उप्रेती, प्रो. लज्जा भट्ट, प्रो. रीना सिंह, प्रो. रुवाली, डॉ. मुकेश सामंत, डॉ. मंडोली, डॉ. सीता देवली, डॉ. गगन होती, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. रवि जोशी, डॉ. दीपा, डॉ. प्रदीप गोस्वामी, नंदा बल्लभ पालीवाल, देवेंद्र बिष्ट, रितेश, कुंदन, अजय, नवीन और लता नितवाल सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
