
देहरादून,17 जुलाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास से राज्य के सभी जिलों में मानसून, अतिवृष्टि, चारधाम यात्रा, डेंगू नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी और अधिकारी केवल बैठकों तक सीमित न रहकर स्वयं ग्राउंड जीरो पर जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को 24×7 अलर्ट मोड में रहने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में एक क्षण की भी देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बिजली, पेयजल, सड़क और संचार सेवाओं की तत्काल बहाली सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, तकनीकी दल और आवश्यक संसाधन पहले से तैनात रखने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि इस वर्ष अब तक 44.65 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन, चिकित्सा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दूरस्थ क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों और ईंधन का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने, गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था करने तथा आवश्यकता पड़ने पर हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में चिकित्सा सहायता के अभाव में जनहानि नहीं होनी चाहिए।
डेंगू की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने, जलभराव समाप्त करने, नियमित फॉगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और स्वच्छता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को सभी अस्पतालों में जांच किट, दवाइयों, रक्त, बेड और चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गत वर्ष की आपदाओं से जुड़े पुनर्निर्माण एवं सुरक्षात्मक कार्यों में कोई भी परियोजना लंबित नहीं रहनी चाहिए। साथ ही सभी जिलों में 15 अक्टूबर तक पूर्ण होने वाले विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने घोषणा की कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान का तीसरा चरण 15 सितंबर से नए स्वरूप में शुरू किया जाएगा, ताकि अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि शिविर केवल औपचारिकता न बनें, बल्कि मौके पर ही आमजन की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित हो।
मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान सभी पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने, नालों की विशेष सफाई, वैकल्पिक संचार व्यवस्था विकसित करने तथा सभी जिलों में एम्बुलेंस, जीवनरक्षक दवाइयों और आपातकालीन संसाधनों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि वह स्वयं विभिन्न जनसेवा हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर व्यवस्थाओं की जांच करते हैं और भविष्य में भी किसी भी समय समीक्षा करेंगे। साथ ही हरेला पर्व के अवसर पर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए सभी अधिकारियों से पौधारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने को कहा।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा से पहले तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि जनहित के मामलों में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।


